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1 फरवरी को ही पेश होगा आम बजट, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

Mon, 23 Jan 2017 06:04 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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वित्त मंत्री अरुण जेटली - फोटो : file photo
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केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच में आम बजट पेश करने की तारीख को लेकर चल रहे टकराव पर विराम लग गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों के चलते बजट की तारीख को आगे बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी है। आम बजट अब 1 फरवरी को पेश होगा। 
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यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए तमाम विपक्षी पार्टियां बजट की तारीख को आगे बढ़ाने की वकालत कर रही थीं। इन पार्टियों की दलील है कि केंद्र की बीजेपी सरकार बजट में लोकलुभावन घोषणाएं कर वोटरों को प्रभावित कर सकती है। विपक्षी पार्टियां इस बाबत पहले चुनाव आयोग और फिर राष्ट्रपति से भी मिली थीं। आखिर में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बजट की तारीख आगे बढ़ाने की गुहार की गई, लेकिन शीर्ष अदालत ने फैसला सरकार के पक्ष में सुनाया है। 
  SC dismisses petition seeking postponement of budget date due to upcoming elections in five states — ANI (@ANI_news) January 23, 2017

क्या है पूरा मामला?

विपक्ष ने की थी 8 मार्च के बाद बजट पेश करने की मांग

उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम घोषित होने के बाद 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट को लेकर मचे सियासी कोहराम के बीच आज विपक्ष ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था। विपक्ष ने चुनाव आयोग से गुहार लगाई थी कि आम बजट 8 मार्च को पांचों राज्यों में विधानसा चुनाव संपन्न होने के बाद पेश हो।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि, 'चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार वोटरों को रिझाने के लिए लोक-लुभावन बजट ला सकती है। निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए यह जरुरी है कि सरकार को तय वक्त से पहले बजट लाने से पहले रोका जाए।'

इससे पहले कांग्रेस समेत कई दल चुनाव से ठीक पहले आम बजट पेश करने पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटा चुके थे। चुनाव आयोग से मिलने वाली विपक्षी पार्टियों में तृणमूल कांग्रेस, बसपा, जेडीयू, आरजेडी, कांग्रेस शामिल थीं। हालांकि इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने विपक्ष की आम बजट की तारीख टालने संबंधी मांग पर विचार विमर्श के बाद फैसला लेने की बात कही थी।
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शिवसेना ने भी किया था जमकर विरोध

वहीं, भाजपा के साथ हर मुद्दे पर टकराव की भूमिका निभाने वाली शिवसेना ने भी एक फरवरी को संसद में पेश होने वाले बजट को लेकर खुला विरोधकिया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा हो चुकी है, इसलिए चुनाव के दौरान संसद में आम बजट प्रस्ताव नहीं पेश किया जाना चाहिए, क्योंकि सत्ताधारी दल इसका फायदा ले सकते हैं।

इसलिए राष्ट्रपति से अपील है कि वे विशेषाधिकार का उपयोग करें। उद्धव ने कहा था कि आम बजट प्रस्ताव में लोक लुभावन योजनाएं घोषित की जाती हैं। इससे आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होगा। इस तरह की योजनाएं बजट प्रस्ताव में घोषित होने से विपक्षी पार्टियों को चुनाव में नुकसान हो सकता है जबकि सत्ताधारी दल इसका फायदा उठा सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि केंद्रीय बजट पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद पेश किया जाए।
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