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सेक्स दवाखानों के दरवाजे हो रहे हैं बंद, कारण जान लीजिए

Mon, 23 Jan 2017 12:04 PM IST
नरेंद्र कौशिक अमरोहा से / बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
हकीम ताजुद्दीन हाशमी दो सेकेंड तक नब्ज पर हाथ रखते हैं और फिर आह लेकर फैसला सुनाते हुए पूछते हैं। "आप बहुत कमजोर हो गए हैं। ये कैसे हुआ?" अगले ही पल वह आपको अपनी जींस खोलने को कहते हैं और टॉर्च से गुप्तांग पर लाल रोशनी डालते हैं। उसके बाद एक छोटी शीशी अपनी मेज की दराज में से निकलते हुए फरमाते हैं,"यह स्वर्ण भस्म है। इसे दवा में मिलाकर लेना पड़ेगा।


भस्म 1950 रुपए की है और दूसरी दवा के 30 हजार रुपए लगेंगे। पूरा 31950 रुपए लगेगा।" इसके बाद अमरोहा के यह हकीम साहब मरीज को एक छोटी सी पुड़िया थमाते हुए कहते हैं- "इसे अंग पर लगाइएगा, जान आ जाएगी।" और 200 रुपए फीस की अलग से ले लेते हैं। हकीम ताजुद्दीन हाशमी समेत कई हकीमों के दवाखाने आजकल सुर्खियों में हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार ने इनकी जांच के आदेश दिए हैं। 

दवाखाना एक स्पेशल हनीमून कोर्स भी चलाता है...

2013 में आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर ने लखनऊ के गोमती नगर में हाशमी दवाखाने समेत 20 दवाखानों के खिलाफ केस दर्ज कराया था, जिन पर गलत प्रचार के जरिए लोगों को ठगने के आरोप थे।

दरअसल उत्तर प्रदेश की प्रमुख सचिव (मेडिकल एजुकेशन) अनिता भटनागर जैन ने हाल ही में सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि वो दवाओं और चमत्कारिक (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 को सख्ती से लागू कराएं। सरकार ने ऐसे दवाखानों के अलावा ताबीज जैसी चीजें बेचने वालों और उनके विज्ञापन देने वालों पर भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

हाशमी दवाखाने की ओर से सेक्स ताकत बढ़ाने के विज्ञापन देना औषधि और जादुई उपचार अधिनियम (आपत्तिजनक विज्ञापन) 1954 की धारा 3 का उल्लंघन बताया गया था। वैसे हाशमी दवाखाना रजिस्टर्ड है और दवाखाना चलाना गैरकानूनी नहीं है। दवाखाना एक स्पेशल हनीमून कोर्स भी चलाता है और दावा करता है कि 'कई नौजवानों' ने इससे अपना हनीमून'और भी रंगीन बनाया' है। 
 

दवाखाना चलाने वाले देते है हर सवाल का जवाब

दवाखाना
हाशमी दवाखाना के हकीम ताजुद्दीन हाशमी ने अपने खिलाफ आरोपों या दर्ज केस को लेकर बात करने से मना कर दिया। उनका कहना था कि "आप हमारे दवाखाने में आएंगे, तभी सवालों के जवाब मिलेंगे।" हमारी बात लखनऊ के डॉ। पीके जैन क्लीनिक के लोगों से भी हुई। इस क्लीनिक का नाम भी 2013 की एफआईआर में था। क्लीनिक के डॉ।

पीयूष जैन ने माना कि उनके क्लीनिक ने लखनऊ के आयुर्वेद और यूनानी प्रभारी को शपथ पत्र देकर कानून का उल्लंघन न करने का वादा किया है पर उन्होंने सेक्स ताकत बढ़ाने वाले विज्ञापनों का बचाव भी किया। वह पूछते हैं- "हमारे सेक्शुअल पोटेंसी बढ़ाने के विज्ञापन गैरकानूनी नहीं हैं। हम वही कर रहे हैं जो आयुर्वेद और शास्त्रों में लिखा है।

क्या वियाग्रा शक्तिवर्धन नहीं करती?" दिल्ली-मुरादाबाद के रास्ते पर मौजूद अमरोहा ऐसे दवाखानों के लिए मशहूर है। हाशमी गुप्त रोग, मर्दाना कमजोरी और निसंतान दंपतियों के इलाज का दावा करते हैं। वह लिंग छोटा होने का भी इलाज करते हैं, जिसे प्रकाश कोठारी और दूसरे सेक्सोलॉजिस्ट बीमारी ही नहीं मानते। तकरीबन ऐसे ही दावे दूसरों कई दवाखाने चलाने वालों के भी हैं। 
 
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226 मामलों में दवाओं और चमत्कारिक उपचार अधिनियम का उल्लंघन

मुरादाबाद में आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी डॉ. सुमन मिश्रा के दफ्तर के कर्मचारी सुदर्शन शर्मा बताते हैं, "जब हम छापेमारी के लिए जाते हैं, तो वो (बिना रजिस्ट्रेशन वाले दवाखाने) गायब मिलते हैं। मकान मालिक हमें बताते हैं कि दवाखाना किराए की दुकान में चल रहा था।"

एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया की महासचिव स्वेता पुरंदरे के मुताबबिक 2014-15 के दौरान परिषद को 226 ऐसे मामले मिले, जिनमें दवाओं और चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम का उल्लंघन किया गया था। उनके अनुसार 2015-16 और उसके आगे के आठ महीनों (नवंबर 2016 तक) उन्हें 180 ऐसे मामले मिले हैं।

हालांकि सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी के अनुसार अगर सेक्स एजुकेशन बढ़ाई जाए और साइको-सेक्शुअल मेडिसिन पढ़ाने वाले कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जाए तो बहुत से सेक्स दवाखाने खुद ही गायब हो जायेंगे। साइको-सेक्शुअल मेडिसिन या काउंसलिंग वो तरीका है जिसके जरिए सेक्शुअल समस्याओं को लेकर हुई मानसिक परेशानियों का इलाज किया जाता है।
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