कैंपा फंड को दूसरे मद में खर्च करने का पता तब चला जब ओडिशा के प्रमुख सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दायर किया गया। इसमें बताया गया कि ये पैसा सड़कों के निर्माण, बस स्टैंड की मरम्मत और कॉलेजों में विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए खर्च हुआ है। इस पर शीर्ष अदालत ने नाराजगी जताई। कैंपा फंड खदानों और औद्योगिक इकाइयों पर वन एवं पर्यावरण के लिए लगने वाला उपकर है।
दूसरे उद्देश्यों के लिए कैंपा फंड खर्च करने पर कोर्ट ने ओडिशा के प्रतिनिधि को कहा, यह पैसा लोगों के कल्याण के लिए है। इसे उसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, न कि आपकी सरकार के कार्यों के लिए। एक राज्य के तौर पर सड़कें बनाना और स्ट्रीट लाइटें लगाना आपका काम है। लोगों के लिए जमा होने वाला पैसा इसमें नहीं लगाया जा सकता। सामाजिक कार्यों के लिए आपका कुल व्यय पांच प्रतिशत भी नहीं है।
ओडिशा से कहा, पैसा लोगों के फायदे के लिए है, आपके लिए नहीं
पीठ ने कहा, हम आपको इसकी इजाजत नहीं दे सकते। यह पैसा लोगों के फायदे के लिए है। सरकार के फायदे के लिए नहीं। इस मामले में न्याय मित्र के तौर पर अदालत की मदद कर रहे वकील ने कहा, इस फंड के तहत जमा हुए पैसे को ओडिशा में आदिवासियों के कल्याण में खर्च किया जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने ओडिशा के वकील का आगे का ब्यौरा देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिए जाने का अनुरोध स्वीकार कर लिया। राज्य के मुख्य सचिव से अगली सुनवाई में पेश होने का कहा गया है।
मेघालय को हलफनामे पर लगाई फटकार
पीठ ने इस मामले में मेघालय के हलफनामे का भी अवलोकन किया। पीठ ने लोगों के कल्याण के लिए जमा की गई रकम को बैंक में ही रखने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। पीठ इस तथ्य से भी नाराज दिखी कि मेघालय के हलफनामे में यह साफ नहीं था कि इस मद में जमा हुआ कितना फंड बैंक में पड़ा है। पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा, बहुत हो गया। यह मजाक बन गया है। पीठ ने मेघालय के हलफनामे को बहुत बुरी तरह बना बताया। मेघालय को हलफनामा दुरुस्त करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। राज्य के प्रमुख सचिव को अगली सुनवाई में पेश होने को कहा गया है।