बुजुर्गों के लिए चलाई जाने वाली कल्याणकारी योजनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य सरकारों से जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने ये जानकारी पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए मांगी। याचिका पर सुनवाई के समय सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पेंशन, प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम और बुजुर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने का निर्देश दिया है।
दरअसल, देश भर में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ वृद्धाश्रम स्थापित करने की मांग करते हुए पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने एक याचिका दाखिल की थी। उनकी इसी याचिका पर शीर्ष अदालत सुनवाई कर रही थी।
पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने अपनी जनहित याचिका में कहा था कि देश में बड़ी संख्या में वृद्ध लोग बढ़ रहे हैं, इनमें से अधिकांश गरीबी में जी रहे हैं। उनके पास ना तो रहने के लिए जगह है और ना ही उचित कपड़े हैं। इतना ही नहीं उन्हें उचित भोजन भी नहीं मिलता है। इसके अलावा पूर्व मंत्री ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के रखरखाव और कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रभावी कार्यान्वयन की भी मांग की थी।
पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने सुनवाई की। पीठ ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि बुजुर्गों के लिए पेंशन, प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम और वृद्धावस्था देखभाल के स्तर के संबंध में बुजुर्गों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों की रिपोर्ट में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम के कार्यान्वयन के संबंध में वर्तमान स्थिति की भी जानकारी दी जाए।
पीठ ने कहा कि दो महीने के भीतर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश इन तीनों बिंदुओं पर अपनी मौजूदा योजनाओं की जानकारी इकट्ठी करके भारत सरकार के एडवोकेट को प्रस्तुत करें। इसके बाद एक संशोधित स्थिति रिपोर्ट भारत संघ द्वारा एक महीने बाद दायर की जाएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए जनवरी 2023 के लिए सूची बद्ध किया है।