सुप्रीम कोर्ट ने सेना में अधिकारियों को प्रमोशन के लिए सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को ध्यान में रखते हुए केंद्र को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। हलफनामे में केंद्र सरकार को सेना में महिला और पुरुष अधिकारियों को सूचीबद्ध करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा।
महिला अधिकारियों का प्रमोशन में भेदभाव का आरोप
सेना की महिला अधिकारियों की तरफ से वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट में सेना में प्रमोशन के लिए सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में कथित भेदभाव का आरोप लगाया था। इसके बाद ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूरी प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। हुजैफा अहमदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 3 नवंबर को ही एक आदेश पारित किया था, जिसमें कोर्ट ने सभी महिला अधिकारियों के नामों पर विचार करने को कहा था, जिनके नामों पर पहले के स्पेशल सलेक्शन बोर्ड 3बी (कर्नल पद के लिए प्रमोट करने वाला बोर्ड) ने भी विचार किया था। सिर्फ उन अधिकारियों के नामों पर विचार नहीं करने को कहा गया था, जो पहले से ही सूचीबद्ध हो चुकी हैं। हुजैफा अहमदी ने कहा कि अन्य सूचीबद्ध अधिकारियों के नामों पर फिर से विचार करना कोर्ट की अवमानना होगी।
वेंकटरमानी ने कोर्ट को बताया कि एक ही बैच के अधिकारियों को मेरिट के आधार पर आंकने की प्रक्रिया ही सूचीबद्ध करना है। महिला अधिकारियों की तरफ से पेश हुए वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि महिला अधिकारियों को प्रमोशन के लिए सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया में पुरुष अधिकारियों के मुकाबले भेदभाव करने के आरोप लगाए। जिसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अब कोर्ट इस मामले पर 11 मार्च को सुनवाई करेगा।
कोर्ट ने पूर्व में सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा था कि सेना में महिला अधिकारियों को सूचीबद्ध करने से इनकार करना मनमाना है। सेना में स्थायी कमीशन पाने वाली महिला अधिकारियों ने कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में महिला सैन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कर्नल पद पर प्रमोशन के लिए उन्हें सूचीबद्ध श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। 17 फरवरी, 2020 को ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ही महिला सैन्य अधिकारियों को सेना में स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था। इसके बाद मार्च 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय नौसेना में भी महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का फैसला सुनाया था।