शीर्ष अदालत ने अब याचिकाओं पर आगे की सुनवाई 25 जनवरी, 2024 को तय की है और कहा है कि वह इसी तरह के मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष लंबित कार्यवाही पर रोक नहीं लगाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में 'अगामिक' परंपरा से शासित मंदिरों में 'अर्चकों' या पुजारियों की नियुक्ति पर अपने पुराने आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत के 25 सितंबर के आदेश में तमिलनाडु सरकार से नियुक्ति में मौजूदा शर्तों को बरकरार रखने को कहा गया था।
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पीठ प्रथम दृष्टया तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे की इस दलील से सहमत नहीं हुई कि राज्य अर्चकों की नियुक्ति का हकदार है। पीठ ने कहा, तर्क यह है कि राज्य सरकार एक विशेष संप्रदाय के मंदिरों में अर्चकों की नियुक्ति में अगम परंपराओं के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं कर रही है।
वंशानुगत योजना में हस्तक्षेप का आरोप
शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार 'तमिलनाडु प्रशासन की ओर से संचालित स्कूलों में 'अर्चकों' के लिए एक साल का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम करने के बाद अन्य संप्रदायों के लोगों को 'अर्चक' बनने की अनुमति देकर 'अगम मंदिरों' में 'अर्चकों' की नियुक्ति की वंशानुगत योजना में हस्तक्षेप कर रही है। शीर्ष अदालत ने अब याचिकाओं पर आगे की सुनवाई 25 जनवरी, 2024 को तय की है और कहा है कि वह इसी तरह के मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष लंबित कार्यवाही पर रोक नहीं लगाएगी।