क्रिप्टोकरेंसी के विनियमन और इससे जुड़े अपराध पर नकेल कसने के लिए तंत्र विकसित करने पर मंथन किया जा रहा है। सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया है कि इस डिजिटल मुद्रा से संबंधित मुद्दे लगातार विकसित हो रहे हैं। सरकार सभी बिंदुओं का संज्ञान लेकर विनियमित करने के तंत्र पर विचार-विमर्श कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट में एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया है कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मुद्दों पर सरकार नजर बनाए हुए है। सरकार ने अदालत में कहा कि इस डिजिटल मुद्रा से जुड़े अपराध पर नकेल कसने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने और इससे जुड़े अपराधों की प्रभावी जांच के लिए एक तंत्र विकसित करने के मामले में अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है। सरकार ने विस्तृत जानकारी देने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा। इस पर अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 21 मार्च को तय की। अदालत ने इससे पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया।
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धोखाधड़ी और क्रिप्टोकरेंसी के दुरुपयोग से बचाने के उपाय
क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मुकदमे की सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की पीठ में हो रही है। शुक्रवार को केंद्र की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने दलीलें पेश कीं।सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, अदालत केवल यह चाहती है कि आम आदमी को धोखाधड़ी और क्रिप्टोकरेंसी के दुरुपयोग से बचाने के लिए सरकार ने क्या उचित सुरक्षा उपाय किए हैं? उन्होंने कहा, जहां तक अलग-अलग राज्यों में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मामलों और भारत सरकार के रूख का सवाल है, केंद्र विस्तार से जवाब दाखिल करेगा।
मुद्राओं की विशेषज्ञ नहीं है सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा, हम इस बात के विशेषज्ञ नहीं हैं कि आपके पास किस प्रकार की मुद्रा होनी चाहिए या मुद्राओं को विनियमित किया जाना चाहिए। क्रिप्टो मामले पर सुनवाई कर रही खंडपीठ ने कहा, यदि मुद्रा को विनियमित करने के लिए कोई तंत्र नहीं है, तो कोई भी मुद्राएं बना सकता है। उस मुद्रा में लेनदेन भी शुरू किया जा सकता है। ऐसा होने पर बहुत खतरनाक हालात बन सकते हैं। कोर्ट कि इस टिप्पणी पर केंद्र की तरफ से पेश वकील ने कहा, सरकार तमाम पहलुओं पर विचार-विमर्श कर रही है।
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कई राज्यों से जुड़ा है पूरा मामला
अदालत में जिस मामले की सुनवाई हो रही है वह झारखंड, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रदेशों से जुड़ा है। इन राज्यों में क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में आरोपी गणेश शिव कुमार सागर की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। आरोपी ने अलग-अलग राज्य में दर्ज प्राथमिकी को एक साथ जोड़ने की मांग की है। शीर्ष अदालत ने 27 जुलाई, 2023 को आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी। अब कोर्ट ने उनके रूख को देखते हए कहा कि आरोपी जांच में शामिल होकर अधिकारी का पूरा सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में गिरफ्तारी से उन्हें पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी। इसी मुकदमे पर पिछली सुनवाई के दौरान सितंबर, 2023 में केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के स्तर पर गहन मंथन की जरूरत है। जुलाई, 2023 में शीर्ष अदालत ने इस मामले में गृह मंत्रालय को भी एक पक्षकार बनाया था।