आर्मी डेंटल कॉर्प्स में भर्तियों पर सरकार ने दी दलील
आर्मी डेंटल कोर (एडीसी) में भर्ती को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि एडीसी में अब से सभी भर्तियां लैंगिक भेदभाव के बिना होंगी। साथ ही पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग से कोई कोटा नहीं होगा।
इससे पहले शीर्ष कोर्ट ने 11 अप्रैल को एडीसी में भर्ती पर नाराजगी जताई थी। दरअसल, तब एडीसी में महिलाओं के लिए केवल केवल 10 फीसदी रिक्तियां थीं। इस पर नाराजगी जताते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि यह घड़ी को उल्टी दिशा में चलाने जैसा है।
आठ मई को मामले में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने जस्टिस बीआर गवई, विक्रम नाथ और संजय करोल की पीठ को बताया कि सरकार ने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग कोटा खत्म करने का फैसला किया है। साथ ही भविष्य की सभी भर्तियां लैंगिक भेदभाव के बिना की जाएंगी। बुधवार को शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर यह आदेश अपलोड किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी नटराज के जवाब के बाद कोयंबटूर की रहने वाली गोपिका नायर की अगुवाई में महिला दंत चिकित्सकों की याचिका का निपटारा कर दिया।
नटराज ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप ही शीर्ष अदालत, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाने वाली याचिकाकर्ताओं के साक्षात्कार और तत्पश्चात परिणाम घोषित होने के बाद 27 लोगों की सूची में तीन को स्थान मिला था। उन्होंने कहा कि चुने गए 27 उम्मीदवारों की पहली सूची में तीन महिला उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। नटराज ने कहा, जहां तक महिलाओं के लिए उन तीन आरक्षित सीटों का सवाल है तो 27 उम्मीदवारों की नियुक्ति के बाद उन सीटों पर महिला उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा पत्र
इस समय देश में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता का मुद्दा जोरों पर है। सरकार सहित कई अन्य संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता न देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा है। इसमें आरएसएस ने कहा है कि समलैंगिक विवाह को अगर कानूनी मान्यता दी जाती है तो इससे भारत की सांस्कृतिक जड़ें हिल जाएंगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पत्र में कहा गया है कि समलैंगिक विवाह को वैध बनाना हिंदू विवाह अधिनियम के मूल उद्देश्य को विफल कर देगा। यह दिखाता है कि कैसे अन्य धर्मों और पश्चिमी देशों के उदार विचार भारत पर हावी हो रहा है और 'हिंदू धर्म की प्रकृति' को प्रभावित कर रहा है।
आरएसएस की महिला शाखा से जुड़ी संवर्द्धिनी न्यास ने समलैंगिक विवाह के वैध होने पर उसके विनाशकारी प्रभावों की ओर शीर्ष अदालत का ध्यान आकर्षित करने की मांग करते हुए कहा है कि ऐसा निर्णय सांस्कृतिक जड़ों को हिला देगा।
हिरासत में मौत का मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका
हिरासत में मौत मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को शीर्ष कोर्ट से झटका लगा है। शीर्ष कोर्ट ने बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की 1990 के हिरासत में मौत के एक मामले में अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में अपनी अपील के समर्थन में अतिरिक्त सबूत पेश करने की याचिका बुधवार को खारिज कर दी।
इससे पहले दिन में शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई से न्यायमूर्ति एम आर शाह को अलग करने की भट्ट की याचिका भी खारिज कर दी थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान भट्ट के वकील ने तर्क दिया कि उनके पूर्वाग्रह की आशंका उचित है क्योंकि न्यायमूर्ति शाह ने हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उसी प्राथमिकी से जुड़ी उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई थी।