उम्रकैदियों को फरलो से पूरी तरह इनकार नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कैदियों को फरलो से इनकार नहीं किया जा सकता है, भले ही उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली हो। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के साथ-साथ जेल महानिदेशक द्वारा फरलो न देने के आदेशों को खारिज कर दिया और संबंधित अथॉरिटी को कानून के अनुसार मामले का परीक्षण करने की छूट दी।
जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि जब फरलो अच्छे जेल आचरण के लिए एक प्रोत्साहन है तो भले ही दोषी को सजा में कोई छूट नहीं मिली हो और उसे जीवन भर के लिए जेल में रहना हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फरलो मांगने के उसके अधिकार को खत्म कर दिया जाए।
शीर्ष अदालत दोषी अतबीर की एक याचिका पर विचार कर रही थी जिसे इस आधार पर फरलो (कुछ दिनों की छुट्टी) देने से इनकार कर दिया गया था कि राष्ट्रपति ने 2012 में उसकी मौत की सजा को इस शर्त के साथ आजीवन कारावास में बदल दिया था कि वह बिना पैरोल के और कारावास में बिना किसी छूट के जीवन भर जेल में रहेगा।