सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश करने के लिए कहा है जो प्रमाणित करते हो कि सेल्यूलर टावर के निकलने वाले रेडिएशन(विकिरण) मनुष्य और पशुओं के लिए हानिकारक है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा है कि मोबाइल हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। ऐसे में इसका विकल्प क्या हो सकता है। पीठ ने कहा कि पहले हमें यह देखना होगा क्या सेल्यूलर टावर मनुष्य और पशुओं केलिए हानिकारक है। पीठ ने कहा है क्या ऐसी कोई वैज्ञानिक अध्य्यन या रिपोर्ट है जो यह प्रमाणित करता हो। पीठ ने याचिकाकर्ता को इस संबंध में दो हफ्ते के भीतर प्रमाण पेश करने केलिए कहा है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि दूसरे देश में क्या व्यवस्था है। उन्होंने कहा ‘ हमने लंदन और न्यूयार्क में टावर नहीं देखे।’ वहीं सेल्यूलर ऑपरेटरों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एल नागेश्वर राव ने कहा कि ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है जो यह बताता हो कि मोबाइल टावर खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि लगभग सभी अदालतों में इस तरह केमामले लंबित है। वरिष्ठ वकील ने यह भी कहा कि दूसरे देशों की अपेक्षा हमारे देश में इससे संबंधित कानून बेहद सख्त है।
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एमएल वर्मा और प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि तमाम स्टडी है जो यह बताती है कि सेल्यूलर टावर से निकलने वाला रेडिएशन मनुष्य और जानवरों के लिए खतरनाक है।