लोकपाल की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के करीब 10 महीने बीत जाने के बाद भी उस पर अमल नहीं किया जा सका है। इस बारे में कोर्ट में दाखिल अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि लोकपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है।
अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि एक मार्च को प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा स्पीकर की नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर बैठक है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 मार्च को तारीख तय की है।
गौरतलब है कि 27 अप्रैल 2017 को लोकपाल की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि, 'लोकपाल एक्ट पर बिना संशोधन के ही काम किया जा सकता है। केंद्र के पास इसका कोई तर्कसंगत जवाब नहीं है कि लोकपाल की नियुक्ति को इतने वक्त तक अधर में क्यों रखा गया। लोकपाल की नियुक्ति बिना नेता विपक्ष तय ही हो सकती है।'
उल्लेखनीय है कि लोकपाल की चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, भारत के प्रधान न्यायाधीश या नामित सुप्रीम कोर्ट के जज और एक नामचीन हस्ती के होने का प्रावधान है।
28 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर फैसला सुरक्षित रखा था। केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोकपाल की नियुक्ति वर्तमान हालात में संभव नहीं है। लोकपाल बिल में कई सारे संशोधन होने हैं जो संसद में लंबित हैं।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे नेता विपक्ष नहीं हैं। कांग्रेस ने नेता विपक्ष का दर्जा मांगा था। लेकिन स्पीकर ने उनकी मांग को खारिज कर दिया था। इससे पहले भी ऐसा हुआ है जब संसद में नेता विपक्ष ना हो। इस संबंध में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को शामिल करने संबंधी संशोधन मानसून सत्र में पास होने की उम्मीद है।