सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ओर से दाखिल बकाया वसूली मामलों की जानकारी देने का निर्देश दिया। न्यायालय ने सरकार से उन मामलों की भी जानकारी मांगी है जो पिछले दस वर्षों से कर्ज वसूली न्यायाधिकरणों (डीआरटी) और उनकी अपीलीय इकाइयों में लंबित हैं।
मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता में न्यायालय की एक पीठ ने सरकार से इस सवाल का जवाब भी मांगा है कि क्या वसूली न्यायाधिकरण इस तरह के मामलों पर एक तय समय सीमा में कानून के तहत फैसला करने की पर्याप्त क्षमता रखते हैं या नहीं?इससे पहले न्यायालय ने जनहित याचिका में उठाए गए एक मुद्दे पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
यह डीआरटी और डीआरएटी में ढांचागत सुविधाएं, श्रमबल एवं अन्य सुविधाओं में कमी से जुड़ा था। बता दें कि डीआरटी और डीआरएटी बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के फंसे हुए कर्ज की वसूली याचिकाओं का निपटारा करते हैं।