सरकार हाल में पारित दिव्यांगता विधेयक के नियमों को 14 अप्रैल तक अंतिम रूप देना चाहती है ताकि अगले शैक्षणिक सत्र से दिव्यांगों को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में पांच फीसदी आरक्षण मिलने लगे।
विधेयक के मुताबिक छह वर्ष से 18 वर्ष के बीच के दिव्यांगों को नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार प्राप्त होगा। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पारित दिव्यांगों के अधिकार विधेयक में दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में तीन से चार फीसदी आरक्षण और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में तीन से पांच फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने बताया कि दिव्यांगता विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया और इसे अधिसूचित किया जा चुका है। अब सरकार इसे जल्द से जल्द लागू करने को इच्छुक है। सरकार की ओर से 14 अप्रैल तक विधेयक को अंतिम रूप देने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण विधेयक दिव्यांगों के लिए बदलाव वाला साबित होगा और इससे भारतीय कानून भी दिव्यांगों के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र समझौते की तर्ज पर होगा। नए कानून के तहत सरकार ने वर्तमान में विकलांगता की श्रेणी को सात से बढ़ाकर 21 कर दिया है।