एक दिन पहले ही घनवट ने केंद्र सरकार की ओर से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था। उन्होंने सोमवार को कहा था कि किसान 40 सालों से कृषि सुधारों की मांग कर रहे थे। कानून वापस लेना अच्छा कदम नहीं है। घनवट ने कहा था कि मौजूदा कृषि प्रणाली उचित और पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा था कि मैं सोचता हूं कि इस सरकार में कृषि सुधारों को लेकर इच्छाशक्ति है। इससे पहले की सरकारों में इस लेकर राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी। मैं उम्मीद करता हूं कि तीनों कृषि कानूनों पर विचार के लिए सभी राज्यों के विपक्षी और किसान नेताओं को शामिल करते हुए एक और समिति का गठन किया जाएगा।
समिति ने तीनों कानूनों का अध्ययन करने व उससे संबंधित पक्षकारों से परामर्श के बाद 19 मार्च को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी। घनवट ने एक सितंबर को भी मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वे इसे जनता के बीच जारी करें, इसकी सिफारिशों से किसान आंदोलन खत्म कराने में मदद मिलेगी।