महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद भी उद्धव और शिंदे खेमे के बीच सियासी जंग जारी है। अब दोनों खेमों के नेता अपने विधायकों की विधायकी को बचाने के लिए कानूनी सहारा ले रहे हैं। दरअसल, शिंदे खेमे ने स्पीकर से उद्धव खेमे के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने के लिए कहा जिसके बाद अब उद्धव खेमे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल इसपर रोक लगाने की मांग की है। वहीं दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव की याचिका को सूचीबद्ध कर लिया है, जिसपर 20 जुलाई को सुनवाई होगी।
तीन जजों की बेंच का गठन
महाराष्ट्र संकट पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन जजों की बेंच का गठन कर दिया है। यह पीठ 20 जुलाई को मामले की सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और हेमा कोहली की पीठ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे और एकनाथ शिंदे खेमे द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इससे पहले 11 जुलाई को शिवसेना के शिंदे गुट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट के 16 विधायकों की अयोग्यता मामले में सुनवाई को फिलहाल टाल दिया था और कहा था कि इस मामले में बेंच गठित की जाएगी। इस प्रक्रिया में समय लगेगा। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर अयोग्यता नोटिस पर तब तक फैसला नहीं कर सकते जब तक कि अदालत उस पर फैसला न दे।
53 विधायकों को कारण बताओ नोटिस
उधर, महाराष्ट्र के सियासी उठापटक के बीच राज्य विधानमंडल सचिव राजेंद्र भागवत ने दोनों पक्षों की शिकायत मिलने पर शिवसेना के दोनों गुटों के 53 विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी को एक सप्ताह के भीतर जवाब देना है। शिवसेना के 53 विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने पर पर महाराष्ट्र विधानमंडल सचिव राजेंद्र भागवत ने कहा कि जब भी हमें कोई आवेदन मिलता है तो हमें उस पर कार्रवाई करनी होती है इसलिए प्रत्येक विधायक को नोटिस जारी किया गया है जिसके खिलाफ आवेदन किया गया था।