संजय कपूर परिवार संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता प्रक्रिया पर संतोष जताया है। पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में चल रही इस बातचीत को कोर्ट ने दो नवंबर तक का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कपूर परिवार से अपील करते हुए कहा कि वे वर्षों चलने वाली मुकदमेबाजी से बचें और आपस में ही मामला सुलझा लें।
दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के परिवार का संपत्ति विवाद क्या अब सुलझने की राह पर है? देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले में चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया को लेकर काफी सकारात्मक संकेत दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि कपूर परिवार का यह पुराना झगड़ा आपसी बातचीत से शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ सकता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की प्रक्रिया बेहद संतोषजनक तरीके से आगे बढ़ रही है।
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क्या पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ करा रहे हैं सुलह?
देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने शीर्ष अदालत को पांच अगस्त की अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंपी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब तक मध्यस्थता के छह सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। पूर्व सीजेआई ने परिवार के सभी सदस्यों से व्यक्तिगत बातचीत की है। इस प्रक्रिया में सहायता के लिए एक वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स विशेषज्ञ की सेवाएं भी ली गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बढ़ाई समय सीमा?
मध्यस्थ के अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। अदालत ने इस प्रक्रिया को जारी रखने के लिए दो नवंबर तक का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया कि इस पूरी मध्यस्थता प्रक्रिया का जो भी खर्च और मध्यस्थ की फीस होगी, उसका भुगतान 'आरके फैमिली ट्रस्ट' के फंड से किया जाएगा।
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शीर्ष अदालत ने क्या चेतावनी दी?
सुनवाई के दौरान जब बातचीत विफल होने की आशंका का जिक्र आया, तो सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही मार्मिक और सख्त संदेश दिया। अदालत ने परिवार से कहा, 'ऐसा दिन मत आने दीजिए।' सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा कि वे खुले मन और खुले दिल से इस प्रक्रिया में भाग लें। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि मध्यस्थता नाकाम हुई, तो परिवार वर्षों चलने वाले कानूनी मुकदमों में उलझा रहेगा।
क्या है इस पूरे विवाद की जड़?
यह कानूनी लड़ाई दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की 80 वर्षीया मां रानी कपूर और उनकी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच है। जून 2025 में संजय कपूर के अचानक निधन के बाद यह विवाद गहरा गया। रानी कपूर का आरोप है कि 2017 में स्ट्रोक आने के बाद उनकी शारीरिक स्थिति का फायदा उठाकर उनकी संपत्तियों को आरके फैमिली ट्रस्ट में ट्रांसफर करा लिया गया था। वहीं दूसरी तरफ, संजय कपूर की पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर से हुए दो बच्चों ने भी दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रिया सचदेव पर संपत्ति पर कब्जा करने का आरोप लगाया था।