फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत के सबसे खतरनाक फाइटर जेट सुखोई-30 MKI पर पायलटों को नहीं है भरोसा

Sat, 03 Jun 2017 08:23 AM IST
amarujala.com- शशिधर पाठक
विज्ञापन
सुखोई 30एमकेआई - फोटो : Wikepedia
विज्ञापन
भारत और रूस के बेहतर संबंधों के संकेत ने भारतीय वायुसेना की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। वायुसेना के अफसर सुखोई-30 एमकेआई की गुणवत्ता को लेकर परेशान हैं। सुखोई के फाइटर पायलट लड़ाकू विमान पर रुटीन उड़ान की ड्यूटी का मुश्तैदी से पालन करते हैं, लेकिन महज दस साल पुराने इस विमान के दुर्घनाग्रस्त होने की चिंता भी सताती रहती है। अफसरों को लगने लगा है कि आने वाले समय में सुखोई के स्पेयर पार्टस समेत इससे जुड़ी अन्य समस्याएं जल्द ही समाप्त हो जाएंगी और फाइटर पायलट बिना किसी हिचक के इस पर भरोसा कर सकेंगे।
विज्ञापन


पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल(रिट.) पीवी नाइक  का कहना है कि मौजूदा समय में भारत के पास सुखोई से बेहतर कोई फाइटर जेट नहीं है। फाइटर जेट महज दस साल पुराना है और दस पुराने फाइटर जेट से इतनी जल्दी दुर्घटना की खबर आना भारत जैसे देश के लिए चिंता की बात है। नाइक का कहना है कि उनके समय में भी सुखोई के स्पेयर पार्ट्स को लेकर समस्या थी। उन्हें बीच में जानकारी मिली थी कि इसे काफी हद तक दूर कर लिया गया है।

वायुसेना मुख्यालय के अनुसार सुखोई-30 एमकेआई विमानों के रखरखाव की स्थिति में काफी तेजी से सुधार हुआ है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि अभी भी स्थिति पूरी तरह से रास्ते पर नहीं है। विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्र का भी कहना है कि सुखोई-30 एमकेआई की स्थिति को लेकर भारत लगातार रूस के साथ चर्चा कर रहा है। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि इसकी एक वजह भारत और रूस के साथ संबंधों में आ रही कुछ शिथिलता भी थी लेकिन जल्द ही इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन

सुखोई फाइटर जेट के साथ क्या है समस्या

सुखोई - फोटो : SELF
सुखोई फाइटर जेट राजस्थान के बाड़मेर में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। सूत्र बताते हैं कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में इसका कारण विमान के इंजन में आई तकनीकी खराबी थी। इसके बाद दो और सुखोई दुर्घटनाग्रस्त हुए। हाल में तेलपुर के पास एक सुखोई-30 एमकेआई दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह दुर्घटना भी वायुसेना की चिंता बढ़ा रही है।

इस दुर्घटना में वायुसेना के पायलटों को लड़ाकू विमान से पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर आने का मौका भी नहीं मिल पाया। वायुसेना ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन विशेषज्ञ यहां भी विमान के सिस्टम में तकनीकी खराबी की प्रबल संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि सुखोई के फ्लाई-बाई-वायर सिस्टम, स्विच का सही जगह पर न होना, इजेक्शन सिस्टम में खराबी समेत अन्य प्रणाली में तकनीकी खराबी के चलते दुर्घटना हो रही थी। लड़ाकू विमान के रख-रखाव में रूस से मिलने वाले कलपुर्जों की गुणवत्ता में खामी थी। वहीं रूस की एजेंसियां, सुखोई की निर्माता कंपनी इसके लिए हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड में असेम्बल होने वाले लड़ाकू विमान की गुणवत्ता पर दोष मढ़ रही थी। रूसी एजेंसी इसके लिए भारतीय पायलटों के प्रशिक्षण तथा मानव त्रुटि को आधार मान रही थी।

कब आया सुखोई

सुखोई - फोटो : mint
-भारत ने 2000 में रूस के साथ 140 सुखोई फाइटरजेट लेने का करार किया। ये विमान तकनीकी हंस्तातरण के तहत एचएएल में असेम्बल किए जाने के आधार पर लेने का सौदा हुआ।

-2002 में भारतीय वायुसेना ने रूस से पहला सुखोई फाइटर जेट हासिल किया।

-2004 में एचएएल में असेम्बल हुआ सुखोई फाइटरजेट वायुसेना को मिला।

-2010 में एचएएल के एयरक्राफ्ट मैनुफैक्चरिंग के महाप्रबंधक वी बालाकृष्णन ने देश में 100 फीसदी सुखोई लड़ाकू विमानों की असेम्बलिंग कर लेने की घोषणा की।

-फाइटर जेट की स्टेट ऑफ आर्ट गुणवत्ता से प्रभावित वायुसेना ने 277 से बढ़ाकर 314 सुखोई लड़ाकू विमानों का बेड़ा तैयार करने पर सहमति जताई। फरवरी 2017 के आंकड़े के अनुसार 230 फाइटरजेट वायुसेना के बेडे में हैं। शेष 2020 तक वायुसेना को मिलने हैं।
विज्ञापन

कब-कब हुई दुर्घटना

30 अप्रैल 2009 पोखरण क्षेत्र में, एक पायलट की शहादत, कारण-फ्लाई-बाई-वायर सिस्टम बताया गया। तीन हफ्ते के लिए सुखोई को उड़ान भरने से रोका गया और व्यापक जांच हुई। इसमें गलत जगह पर स्विच लगाना भी कारण में शामिल हुआ।
30 नवंबर 2009 जैसलमेर में सुखोई-30 एमकेआई दुर्घटना।
13 दिसंबर 2011 पुणे के निकट लेहगांव में दुर्घटना
19 फरवरी 2013 आयरन फीस्ट युद्धाभ्यास के दौरान दाहिने पंख में विस्फोट।
14 अक्तूबर 2014- लेहगांव, पुणें में दुर्घटनाग्रस्त। तत्कालीन वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल अरूप राहा ने बताई फाइटर जेट प्रणाली में समस्या। फ्लीट की उड़ान रोकी गई। रूस के तकनीशियन भी आए। वृहद जांच आरंभ।
15 मार्च 2015 बाड़मेर में दुर्घटना।
19 मई 2015 को तेजपुर के पास दुर्घटना।
23 मई 2017 को तेजपुर के पास दुर्घटना।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें