केंद्र सरकार गन्ना किसानों को राहत देने के लिए चीनी मिलों को एथेनॉल पर दूसरा राहत पैकेज देने के प्रस्ताव पर बुधवार को कैबिनेट मुहर लगा सकती है। इसमें चीनी मिलों को एथेनॉल के लिए 10 से 12 हजार करोड़ रुपये तक कम दर पर ऋण मुहैया कराया जा सकता है। इससे पहले गतवर्ष सितंबर में भी चीनी मिलों को सरकार ने राहत प्रदान की थी।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में चीनी मिलों पर किसानों का भारी बकाया है। ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले सरकार किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए कैबिनेट दूसरे राहत पैकेज पर मुहर लगा सकती है। उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों के एक अधिकारी के मुताबिक चीनी मिलों को अगले पांच साल तक के लिए 6 प्रतिशत की दर पर ऋण मुहैया करा सकती है। मिलों में एथेनॉल की क्षमता को बढ़ाने के लिए यह पैकेज दिया जाएगा।
कैबिनेट में इस पर फैसला हो सकता है, जिसमें 10 से 12 हजार करोड़ रुपये तक का पैकेज कम दर पर मिलों को ऋण मुहैया कराने के लिए दिया जाएगा। साथ ही उत्तर प्रदेश से आई चीनी मिलों का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बढ़ाने की मांग पर विचार किया जा सकता है। उसकी ओर से यह दर 29 रुपये से बढ़ाकर 32 रुपये किए जाने कि सिफारिश की गई है। हालांकि गतवर्ष सरकार ने गन्ने का एफआरपी बढ़ाया था और चीनी का न्यूनतम बिक्त्रस्ी मूल्य 29 रुपये निर्धारित किया गया था।
मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार गन्ने की रोपाई से एथेनॉल बनाने के लिए मिल लगाने के लिए भी पैकेज दिया जा सकता है। मंत्रालय की ओर से विभिन्न स्तरों पर गन्ना किसानों को राहत मुहैया कराने के लिए पेशकश की गई है। अब आगे कैबिनेट को निर्णय लेना है कि कम दर पर मिलों को ऋण किन मामलों में दिया जाए। उन्होंने बताया कि यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है, क्योंकि किसानों का बकाया बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपये पहुंच चुका है। और सरकार चाहती है कि गन्ना बकाया की रकम आने वाले चुनावों के दौरान मुद्दा नहीं बने।
पिछले साल सरकार ने एफआरपी बढ़ाने के अलावा भी चीनी मिलों को वित्तीय सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कदम उठाए थे। मिलों को निर्यात में छूट, बफर स्टॉक में सब्सिडी जैसे कदम इन राहतों में शामिल थे। साथ ही निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पड़ोसी देशों में संभवानाएं भी सरकार द्वारा तलाशी गई थीं। हालांकि सभी कदम पूरा बकाया चुकाने के मद्देनजर नाकाफी साबित हुए।