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बयान: तमिल मूल के सुब्रमण्यम स्वामी ने की संस्कृत की वकालत, बोले- इसे बनाया जाए देश की आधिकारिक भाषा

Thu, 09 Dec 2021 02:35 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यह पहली बार नहीं है, जब स्वामी ने संस्कृत को अनिवार्य करने की मांग उठाई है। वे इससे पहले भी कई मौकों पर केंद्र से ऐसी ही मांग कर चुके हैं।
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सुब्रमण्यम स्वामी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार से संस्कृत को भारत की आधिकारिक भाषा बनाने की मांग रखी है। तमिलनाडु से आने वाले स्वामी ने बुधवार को कर्नाटक के उडुपी स्थित श्रीकृष्ण मठ में एक लेक्चर के दौरान कहा कि सरकार को सभी स्कूलों में संस्कृत में शिक्षा देना अनिवार्य करना चाहिए। इससे बच्चों का मानसिक विकास बेहतर ढंग से होता है। 
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स्वामी ने आगे कहा, "हिंदी, उर्दू, मराठी और नेपाली भाषाएं देवनागरी लिपी के इस्तेमाल से बनी हैं और इन सभी भाषाओं की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। योग से जुड़ा सारा साहित्य भी संस्कृत में ही लिखा गया है।"

उन्होंने कहा, "संस्कृत भाषा का विकास हिंदुओं को जोड़ने और उनमें एक जैसा होने का भाव भी पैदा करेगा।" स्वामी के साथ इस कार्यक्रम में अदमार मठ के गुरु स्वामी इशाप्रैया भी मौजूद थे। कार्यक्रम में इदानीर मठ के प्रमुख स्वामी सच्चिदानंद भारती तीर्थ ने भी संबोधन दिया। 
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यह पहली बार नहीं है, जब स्वामी ने संस्कृत को अनिवार्य करने की मांग उठाई है। वे इससे पहले भी कई मौकों पर केंद्र से ऐसी ही मांग कर चुके हैं। स्वामी ने कुछ समय पहले बताया था कि संविधान में कहा गया है कि हिन्दी में संस्कृत के शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। संस्कृत कंप्यूटर के लिए सबसे अनुकूल भाषा है। यह बात नासा ने भी मानी है।
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