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अध्ययन: दिमाग को जल्द बूढ़ा बना देता है धूम्रपान, लत छोड़ने के बाद भी मूल आकार में नहीं आ पाता मस्तिष्क

Sun, 17 Dec 2023 07:16 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

शोधकर्ताओं के अनुसार, धूम्रपान मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। प्राकृतिक तौर पर भी उम्र बढ़ने के साथ दिमाग के आयतन में स्वाभाविक रूप से कुछ न कुछ कमी जरूर आती है।
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धूम्रपान - फोटो : istock
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विस्तार
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धूम्रपान से मस्तिष्क सिकुड़ जाता है और यह लत दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना देती है। एक अध्ययन में सामने आया है कि धूम्रपान छोड़ने से मस्तिष्क के ऊतकों को हो रहे और अधिक नुकसान से तो बचाया जा सकता है, लेकिन मस्तिष्क दोबारा अपने मूल आकार में वापस नहीं आता। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल बायोलॉजिकल साइकाइट्री-ग्लोबल ओपन साइंस में प्रकाशित हुआ है।
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शोधकर्ताओं के अनुसार, धूम्रपान मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। प्राकृतिक तौर पर भी उम्र बढ़ने के साथ दिमाग के आयतन में स्वाभाविक रूप से कुछ न कुछ कमी जरूर आती है।

जितने ज्यादा कश, उतना छोटा दिमाग
धूम्रपान और मस्तिष्क के आयतन के बीच का संबंध हर दिन किए जा रहे धूम्रपान की मात्रा पर निर्भर करता है। एक व्यक्ति दिन में जितना अधिक धूम्रपान करता है, उसके मस्तिष्क का आयतन उतना ही कम होता है।
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अब तक के अध्ययनों में मस्तिष्क पर नहीं था ध्यान
अध्ययन से जुड़ीं वरिष्ठ शोधकर्ता प्रोफेसर लॉरा बेरुत के मुताबिक, इससे पहले वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क पर पड़ रहे धूम्रपान के प्रभावों को नजरअंदाज कर दिया था। वे मुख्य रूप से फेफड़ों और हृदय पर पड़ रहे इसके प्रभावों का अध्ययन कर रहे थे। जैसे-जैसे हमने मस्तिष्क को अधिक बारीकी से देखना शुरू किया तब यह स्पष्ट हुआ कि धूम्रपान मस्तिष्क के लिए भी हानिकारक है।

तंबाकू से हर साल 87 लाख की मौत
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तंबाकू हर साल 87 लाख लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार है। यानी यह हर चार सेकंड में एक मौत। इनमें से 13 लाख लोग वे हैं जो न चाहते हुए भी इसके कारण पैदा हुए धुएं का शिकार बन जाते हैं। अधिकृत आंकड़ों के अनुसार, भारत में धूम्रपान से हर वर्ष करीब 10 लाख लोगों की मौत हो रही है।
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