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अध्ययन: भारतीय वैज्ञानिकों ने किया दावा, 1.5 एमएल खून में 12 से कम कैंसर सेल तो जिंदगी हो सकती है लंबी

Mon, 28 Mar 2022 06:23 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, पुणे।

सार

मुंह के कैंसर के 500 मरीजों का विश्लेषण हुआ। इनमें से 152 मरीज 4 वर्ष चले इस अध्ययन में शामिल किए गए। जिन मरीजों में 20 से ज्यादा सीटीसी था, उनका कैंसर एडवांस स्टेज में था। यानी दुखद रूप से उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा था
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कैंसर सेल। (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
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विस्तार
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भारतीय वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अगर मुंह के कैंसर के मरीज के 1.5 मिलीलीटर रक्त में 12 से कम कैंसर सेल हैं तो उसके लंबे समय तक जीने की संभावना बढ़ जाती है। 20 से अधिक सेल होने के मायने हैं कि मरीज का कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है। रक्त में पहुंचे इन कैंसर सेल को सर्क्युलेटिंग ट्यूमर सेल (सीटीसी) कहा जाता है। मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल के डॉ. पंकज चतुर्वेदी, डॉ. जयंत खंदारे और पुणे स्थित एक्टोरियस आंकोडिस्कर टेक्नोलॉजी नामक कंपनी की टीम ने यह अध्ययन किया है। 

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500 मरीजों का विश्लेषण

  • मुंह के कैंसर के 500 मरीजों का विश्लेषण हुआ। इनमें से 152 मरीज 4 वर्ष चले इस अध्ययन में शामिल किए गए।
  • उनके शरीर से 1.5 एमएल रक्त लेकर उसमें सीटीसी की गणना की गई। इसे सिर और गले के कैंसरों का भारत में सबसे बड़ा अध्ययन माना जा रहा है।


20 से ज्यादा सीटीसी तो एडवांस स्टेज

  • जिन मरीजों में 20 से ज्यादा सीटीसी था, उनका कैंसर एडवांस स्टेज में था। यानी दुखद रूप से उनके पास ज्यादा समय नहीं बचा था
  • 12 सीटीसी वाले मरीजों का कैंसर शुरुआती चरण में था। संभावना जताई गई कि वे कुछ समय ज्यादा जी सकेंगे

14 लाख भारतीय कैंसर पीड़ित

  • राष्ट्रीय कैंसर पंजीकरण के अनुसार देश में करीब 14 लाख नागरिक इस समय कैंसर पीड़ित हैं
  • 1.2 लाख यानी करीब 9 फीसदी अकेले महाराष्ट्र में हैं।
  • 5,727 मौत इस राज्य में तीन साल पहले कैंसर से हुई थी।
  • 11,306 था बीते वर्ष यह आंकड़ा।

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इस आधार पर निकाला निष्कर्ष
ज्यादा मात्रा में सीटीसी मिलने का मतलब था कि मरीज में नोडल मेटासिस शुरू हो चुका है। यानी शरीर के जिस हिस्से में यह कैंसर सबसे पहले पनपना शुरू हुआ था, अब वहां से कैंसर कोशिकाएं ज्यादा मात्रा में टूट कर रक्त के साथ बहते हुए शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंच रही थीं।

कैसे हो सकती है जांच
जांच के लिए अध्ययन में शामिल कंपनी के ऑन्कोडिस्कवर परीक्षण का उपयोग हुआ। इसे सरकार के जैव-तकनीकी विभाग की वित्तीय सहायता से तैयार किया गया। यह इकलौता सीटीसी परीक्षण है जिसे भारत के औषध महानियंत्रक ने अपने नियमों के तहत प्रमाणित किया है। इसका उपयोग सिर, गले, स्तन, फेफड़े, उदर, रेक्टल आदि कैंसर की जांच में होता है।

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