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Study: स्किन कैंसर से हर साल हो रही एक तिहाई मौतों की वजह धूप, 2019 में करीब 19 हजार लोग गंवा चुके हैं जान

Sun, 12 Nov 2023 07:02 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

इसके बाद एक ऐसा घाव बन जाता है जो ठीक नहीं होता है। इस प्रकार के त्वचा कैंसर के कुछ प्रकार कुछ महीनों या उससे भी अधिक समय में बढ़ते हैं। जबकि नान मेलानोमा कैंसर की पहचान देरी से होती है।
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skin cancer
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विस्तार
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कड़ी धूप में काम करने वाले लोग बड़ी संख्या में नॉन मेलेनोमा स्किन कैंसर का शिकार बन रहे हैं। इतना ही नहीं नॉन मेलेनोमा स्किन कैंसर से होने वाली करीब एक तिहाई मौतें धूप में काम करने से जुड़ी होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की संयुक्त रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ, जो जर्नल एनवायरनमेंट इंटरनेशनल में प्रकाशित हुई। 

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शोध के नतीजे दर्शाते हैं कि 2019 में करीब 160 करोड़ लोग खुले में काम करते समय सूर्य के हानिकारक पराबैंगनी विकिरण (अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन) के संपर्क में आए थे। इन लोगों की आयु 15 वर्ष या उससे अधिक थी, जो दुनिया में काम करने योग्य आबादी के करीब 28.4 फीसदी के बराबर है। रिपोर्ट के अनुसार 2019 में 183 देशों के करीब 19 हजार लोग धूप में काम करने की वजह से नॉन मेलेनोमा स्किन कैंसर के कारण मारे गए।

क्या है स्किन कैंसर
नान मेलेनोमा स्किन कैंसर, कैंसर के एक विशेष समूह को संदर्भित करता है जो त्वचा की ऊपरी परतों (एपिडर्मिस) में विकसित होता है। इस कैंसर के दो मुख्य प्रकार बेसल सेल कार्सिनोमा और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा हैं। यह त्वचा कैंसर एक ठोस लाल गांठ और एक पपड़ीदार वृद्धि के रूप में शुरू होता है, जिसमें खून बहता है या पपड़ी विकसित हो जाती है।
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इसके बाद एक ऐसा घाव बन जाता है जो ठीक नहीं होता है। इस प्रकार के त्वचा कैंसर के कुछ प्रकार कुछ महीनों या उससे भी अधिक समय में बढ़ते हैं। जबकि नान मेलानोमा कैंसर की पहचान देरी से होती है।

त्वचा कैंसर, कैंसर का सबसे आम रूप
40% मामले नॉन मेलेनोमा कैंसर की रिपोर्ट के अनुसार त्वचा कैंसर, कैंसर का सबसे आम रूप है। वैश्विक स्तर पर कैंसर के कम से कम 40% मामले इसके लिए जिम्मेदार हैं। यह प्रति वर्ष कम से कम 20 से 30 लाख लोगों में होता है।

यह खतरा केवल श्रमिकों तक ही सीमित नहीं है। किसान, ट्रैफिक पुलिस, डिलिवरी बॉय, अन्य फील्ड वर्कर्स भी इसके खतरे के दायरे में आते हैं। 2000 से 2019 के बीच त्वचा कैंसर से होने वाली मौतें बढ़कर दोगुनी हो गई हैं। 2000 में जहां 10,088 मौतें दर्ज की गई थी, वहीं 2019 में मौतों का आंकड़ा 18,960 पर पहुंच गया।

उचित प्रशिक्षण से बचाई जा सकती है हजारों जान
इससे बचाव के लिए श्रमिकों और अन्य कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देना भी जरूरी है। सनस्क्रीन और आवश्यक मेडिसिन ट्यूब के साथ सुरक्षा प्रदान करने वाले कपड़े उपलब्ध कराना भी बचाव में कारगर हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक चूंकि त्वचा से जुड़े कैंसर कई वर्षों या दशकों में विकसित होते हैं, ऐसे में कम उम्र में ही श्रमिकों को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाना बेहद महत्वपूर्ण है। सरकारों को खुले वातावरण में काम करने वाले श्रमिकों को धूप की वजह से होने वाले त्वचा संबंधी कैंसर से बचाने के लिए उन्हें छाया प्रदान करना, काम करने की छोटी-छोटी शिफ्ट बनाना, धूप की जगह काम के घंटों को छाया के समय शिफ्ट करना जैसे उपाय शामिल हैं।

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