शोधकर्ताओं ने तंजानिया के न्येरेरे नेशनल पार्क के 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अध्ययन के दौरान सड़कों और पगडंडियों के किनारे पेड़ों पर 50 जोड़ी कैमरे लगाए। प्रत्येक कैमरे के बगल में माइक्रोफोन लगाए ताकि वे कैमरे से तेंदुए की पहचान कर सकें और फिर ऑडियो से दहाड़ने की आवाज निकाल सकें।
अब अलग-अलग तेंदुओं को उनकी दहाड़ के आधार पर पहचाना जा सकेगा। इससे उनके संरक्षण को ज्यादा बल मिलेगा। अध्ययन में सामने आया है कि हर तेंदुए की अपनी अलग दहाड़ होती है। बड़े मांसाहारियों के पहले बड़े पैमाने पर कैमरा ट्रैप और रिकॉर्डिंग सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने 93 फीसदी सटीकता के साथ उनकी आवाज से हर एक तेंदुए की पहचान करने का दावा किया है। यह अध्ययन रिमोट सेंसिंग इन इकोलॉजी एंड कंजर्वेशन में प्रकाशित हुआ है।
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शोधकर्ताओं ने तंजानिया के न्येरेरे नेशनल पार्क के 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अध्ययन के दौरान सड़कों और पगडंडियों के किनारे पेड़ों पर 50 जोड़ी कैमरे लगाए। प्रत्येक कैमरे के बगल में माइक्रोफोन लगाए ताकि वे कैमरे से तेंदुए की पहचान कर सकें और फिर ऑडियो से दहाड़ने की आवाज निकाल सकें। तेंदुए की दहाड़ के अस्थायी पैटर्न का विश्लेषण करने के लिए एक मॉडलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया और इससे पता चला कि हर एक की पहचान संभव है। यह पहचान वास्तविकता से करीब 93.1 फीसदी तक सटीक पाई गई। इस सफल प्रयोग को तेंदुओं के संरक्षण में आवाज की पहचान या बायोएकॉस्टिक्स के उपयोग की दिशा में पहला बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा है।
गहरी और कर्कश आवाज
शोधकर्ताओं का कहना है कि तेंदुओं की दहाड़ अनोखी होती है, यह न सिर्फ महत्वपूर्ण बल्कि एक बुनियादी खोज है। इनका कम आवृत्ति वाली दहाड़ कम से कम एक किलोमीटर दूर से सुनी जा सकती है। आमतौर पर नर तेंदुए दहाड़कर अपने क्षेत्र की रक्षा करते हैं और मादा तेंदुए साथी को आकर्षित करती हैं। अपने शावकों को बुलाती हैं। तेंदुओं की दहाड़ एक विशिष्ट गहरी और कर्कश आवाज होती है, जिसे अक्सर आरा लगाना कहा जाता है। नर और मादा दोनों तेंदुए ये आरी चलाने वाली आवाजें निकालते हैं। तेंदुए कई तरह की गुर्राहटें, झपट्टा, म्याऊं, घुरघुराहट और फुफकारें भी निकालते हैं।
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आबादी का पता लगाना होगा आसान
नई तकनीक से बहुत बड़े क्षेत्रों में तेंदुओं पर नजर रखने में मदद मिलेगी। आबादी का अनुमान लगाने जैसे अधिक जटिल अध्ययनों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटर्ड स्पीशीज के अनुसार तेंदुओं को विलुप्त होने के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसका मुख्य कारण निवास स्थान का नुकसान और मानव-वन्यजीव संघर्ष है।