दीक्षांत समारोह में अब खादी से तैयार भारतीय और क्षेत्रीय पहचान को दर्शाते परिधान ड्रेस कोड के रूप में नजर आएंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश के सभी 750 विश्वविद्यालयों को इस बाबत पत्र लिखा है। निर्देश दिए कि दीक्षांत समारोह में हैंडलूम फैब्रिक से तैयार भारतीय और क्षेत्रीय परिधानों में छात्रों को डिग्री दी जाए। इस संबंध में विवि से रिपोर्ट भी मांगी गई है।
गौरतलब है कि 15 सितंबर 2017 को पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर की अध्यक्षता में दीक्षांत समारोह में भारतीय परिधान में आयोजित करने पर बैठक हुई थी। केंद्रीय मंत्री की मंजूरी के बाद मंत्रालय ने आम लोगों, छात्रों, शिक्षाविदें व राज्यों से सुझाव मांगे थे। इसी के आधार पर एक परिधान के बजाय सभी राज्यों की संस्कृति पर आधारित परिधानों को प्रमोट करने का फैसला लिया गया था।
सभी राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थान अपने राज्य की वेशभूषा को दर्शाते हैंडलूम फैब्रिक से निर्मित परिधान दीक्षांत समारोह में ड्रेस कोड बना सकेंगे। कश्मीर में कश्मीरी ड्रेस, पंजाब में सलवार-सूट, हरियाणा में हरियाणवी ड्रेस, उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों में पहने जाने वाली पारंपरिक ड्रेस, नार्थ-ईस्ट व पश्चिम, दक्षिण समेत अन्य राज्य अपनी संस्कृति को दर्शाती ड्रेस पहनेंगे।