सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाओं के एक समूह में उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, जिन पर प्रदर्शन के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप है।
किससे जुड़ी हैं याचिकाएं?
कुछ याचिकाएं उन सरकारी अधिकारियों की ओर से भी दायर की गई हैं, जिन्हें कथित तौर पर प्रदर्शन के दौरान चोटें आई थीं। एक याचिका प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी दायर की गई है। चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इन मामलों की सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने शीर्ष कोर्ट से कहा, पिछले आदेश के मुताबिक अब तक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) के मामले में क्या किया जाना है, इसे लेकर कुछ गलतफहमी या संवाद की कमी हुई थी। मुझे सरकार की ओर से यह कहने का निर्देश मिला है कि सरकार अपने इस वादे को पूरा करने के लिए गंभीर है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, मैंने इसको लेकर वृंदा ग्रोवर से चर्चा की है। हमें यह देखना होगा कि इसे किस तरह आगे बढ़ाया जाए।
वकील वृंदा ग्रोवर ने क्या कहा?
वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा, मुद्दा यह है कि एफआईआर वापस ली जाएंगी या उन्हें रद्द किया जाएगा। यह मामला शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर था। ये युवा लोग हैं, जिनका पूरा जीवन उनके आगे है। एफआईआर रद्द कराने के लिए भी हमारे पास बिहार, बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जुड़े मामले हैं। राज्यों के साथ बातचीत पूरी होने के बाद हम दोबारा इस कोर्ट के सामने आएंगे।मेहता ने कहा, कानून के तहत जिस भी तरीके से यह संभव होगा, सरकार अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।
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आपराधिक रिकॉर्ड वालों को अलग किया जाए: सीजेआई
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, पहले यह देखना होगा कि कुल कितनी एफआईआर दर्ज हैं। इसके बाद दूसरा काम यह होगा कि उन लोगों को अलग किया जाए, जिनका पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड है।
सरकार ने क्या कहा?
मेहता ने कहा, एफआईआर वापस लेना कानूनी तौर पर संभव नहीं है। उन्होंने कहा, कुछ लोग इस मामले को लगातार गर्म रखना चाहते हैं, इसलिए हमें कानूनी सलाह को लेकर सावधानी बरतनी होगी। वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा, अलग-अलग लोक अभियोजकों (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की ओर से मामले को बंद कराने की प्रक्रिया लंबी और अनिश्चित होती है। मेहता ने कहा, जवाब तैयार है, लेकिन मैंने अभी इसे पढ़ा नहीं है। दाखिल करने से पहले मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि इसमें कोई कमी न हो।
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने क्या कहा?
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, उनके जवाब में कुछ सवालों के जवाब दिए जाने चाहिए। शंकरनारायणन ने कहा, आदेश को लेकर स्पष्टीकरण की जरूरत है। हमने उन पुलिस अधिकारियों की पहचान की है, जिन्होंने कार्रवाई की थी। हलफनामे में यह बताया जाना चाहिए कि रैपिड एक्शन फोर्स (आएरएएफ) को निर्देश देने की जिम्मेदारी किसकी थी। पुलिस आयुक्त और आरएएफ के निदेशक को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे बताएं कि उन्होंने पैलेट गन और लाठीचार्ज की अनुमति कैसे दी।
शंकरनारायणन ने कहा, पुलिस को इस तरह से काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसमें कोई सवाल ही नहीं उठता है। हमने वीडियो पेश किए हैं। हम कोर्ट का ध्यान इस बेहद गंभीर मामले की ओर दिला रहे हैं। हलफनामे में इन सवालों के जवाब दिए जाने चाहिए। जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा?
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, जब माननीय सॉलिसिटर जनरल कहते हैं कि वह इस पर विचार करेंगे, तो शायद बिना पिछले आदेश को स्पष्ट किए वह इस पर आगे नहीं बढ़ सकते। ये छात्र हैं। किसी का कोई छोटा-मोटा मामला हो सकता है, जैसे ड्राइविंग से जुड़ा उल्लंघन या कोई मामूली अपराध या फिर किसी राजनीतिक मामले की वजह से केस दर्ज हो सकता है। 'आपराधिक रिकॉर्ड' शब्द को स्पष्ट करने की जरूरत है।
सिंघवी ने कहा, मैं एक वाक्य जोड़ने की मांग कर रहा हूं, जिसमें छोटे अपराधों और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों को बाहर रखा जाए। जब तक मामला हत्या या दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध का न हो, तब तक 'आपराधिक रिकॉर्ड' शब्द का दायरा बहुत व्यापक है।
मेहता ने कहा, मैंने यह सूची वृंदा ग्रोवर के साथ साझा की थी। इसमें दुष्कर्म, हत्या और पॉक्सो जैसे मामले शामिल थे। इसमें ड्राइविंग उल्लंघन जैसे कोई मामले नहीं थे। इसके बाद कोर्ट ने अपने आदेश में 'आपराधिक रिकॉर्ड' शब्द को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका मतलब गंभीर और जघन्य अपराधों से है। मेहता ने कहा, हमने भी इसे इसी तरह समझा है।
सीजेआई ने क्या कहा?
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन जिस भी तरीके से किया जाए, उसकी अध्यक्षता किसी पूर्व जज को करनी चाहिए। एसआईटी की जगह एक उच्च स्तरीय समिति भी बनाई जा सकती है। वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा, इसकी अध्यक्षता किसी पूर्व पूर्व सीजेआई को करनी चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वाले किसी पुलिस अधिकारी को अनुचित संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में कोई आदतन अपराधी भी संरक्षण हासिल कर ले।
वकील वृंदा ग्रोवर ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर कहा, दिल्ली पुलिस का ऐसा कोई आदेश नहीं है, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दी गई हो या इस हथियार का जिक्र किया गया हो। याचिका में यह नहीं कहा गया है कि पुलिस के पास खुद की सुरक्षा के लिए कोई साधन नहीं होना चाहिए। लेकिन यह खास हथियार इस्तेमाल के लिए उपयुक्त नहीं है।
कोर्ट ने मामले को 18 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा, अगली तारीख पर एसआईटी के गठन और समिति के कामकाज के लिए तय किए जाने वाले नियमों पर भी विचार किया जा सकता है। वकील ने कहा, मैं हिरासत में रखे गए लोगों को कानूनी सहायता देने के लिए निजामुद्दीन थाने गया था। वहां मेरे साथ मारपीट की गई। सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जा सकता है।