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सिद्धारमैया की कहानी : आजादी से पहले जन्में, वकालत की और सियासत में रखा कदम, एक बेटे की हो चुकी है मौत

Sun, 14 May 2023 06:43 PM IST
हिमांशु मिश्रा इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अभी हम आपको कर्नाटक में कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार सिद्धारमैया की कहानी बताने जा रहे हैं। कैसे उन्होंने सियासत में कदम रखा और इस मुकाम तक पहुंचे। आइए जानते हैं... 
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कांग्रेस नेता सिद्धारमैया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल की है। 224 विधानसभा सीटों वाले कर्नाटक में पार्टी को 135 पर जीत मिली है। 2018 में 104 सीटें जीतने वाली भाजपा 66 पर फिसल गई है। जेडीएस के खाते में 19 सीटें गईं। खैर, अब कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर जोर आजमाइश शुरू हो गई है। दो बड़े दावेदार हैं। पहला पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और दूसरे कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार। कुछ देर में विधायक दल की बैठक होनी है। इसमें कांग्रेस विधायक तय करेंगे कि उनका अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
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अभी हम आपको मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार सिद्धारमैया की कहानी बताने जा रहे हैं। कैसे उन्होंने सियासत में कदम रखा और इस मुकाम तक पहुंचे। आइए जानते हैं... 

सिद्धारमैया के बचपन की कहानी से शुरू करते हैं
कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार सिद्धारमैया का जन्म देश की आजादी से ठीक पहले तीन अगस्त 1947 को मैसूर में हुआ था। तब ब्रिटिश का राज हुआ करता था। सिद्धारमैया के पिता सिद्धारमे गौड़ा मैसूर जिले के टी. नरसीपुरा के पास वरुणा होबली में खेती करते थे। मां बोरम्मा गृहणी थीं। दस साल की उम्र तक उनकी कोई औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं हुई थी। इसके बाद गांव के ही स्कूल में पढ़े। बाद में उन्होंने बीएससी और फिर एलएलबी की पढ़ाई मैसूर विश्वविद्यालय से की। पांच भाई-बहनों में सिद्धारमैया दूसरे नंबर पर हैं और वह कुरुबा गौड़ा समुदाय से हैं। सिद्धारमैया मैसूर के मशहूर वकील चिक्काबोरैया के अधीन जूनियर थे और बाद में उन्होंने कुछ समय के लिए कानून पढ़ाया।
 

सियासी सफर कैसा रहा? 
सिद्धारमैया साल 1983 में पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर कर्नाटक विधानसभा में चुनकर आए। 1994 में जनता दल सरकार में रहते हुए कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री बने। एचडी देवगौड़ा के साथ विवाद होने के बाद जनता दल सेक्युलर का साथ छोड़ा और 2008 में कांग्रेस का हाथ पकड़ा। 

वे 2013 से 2018 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं। उन्होंने अब तक 12 चुनाव लड़े हैं जिसमें से नौ में जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री रहते हुए गरीबों के लिए चलाई गई उनकी कई योजनाओं की काफी तारीफ हुई, जिसमें सात किलो चावल देने वाली वालाअन्न भाग्य योजना, स्कूल जाने वाले छात्रों को 150 ग्राम दूध और इंदिरा कैंटीन शामिल थीं। 

सिद्धारमैया का नाम विवादों में भी खूब रहा है। उनके कार्यकाल में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती धूमधाम से मनाई जाती थी। इसके अलावा उन्होंने पीएफआई और एसडीपीआई के कई कार्यकर्ताओं को रिहा करने का भी आदेश दिया था। 

दो बेटे हुए, एक की मौत हो गई 
सिद्धारमैया की पत्नी का नाम पार्वती है। दोनों के दो बेटे हुए। राजनीति में अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने वाले उनके बड़े बेटे राकेश की 2016 में 38 साल की उम्र में मौत हो गई थी। बताया जाता है कि मल्टी ऑर्गन फेल्योर के चलते उनकी मौत हुई थी। दूसरे बेटे यतींद्र 2018 में विधायक चुने जा चुके हैं। इस बार यतींद्र को टिकट नहीं मिला। 
 

कब-कब सिद्धारमैया चुनाव जीते
साल   पार्टी
1983   निर्दलीय
1985   जनता पार्टी 
1994   जनता दल
2006 (उप-चुनाव)   कांग्रेस
2008 कांग्रेस
2013   कांग्रेस
2018     कांग्रेस
                   
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दो बार डिप्टी सीएम, एक बार सीएम रहे
सिद्धारमैया दो बार कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पहली बार 16 मई 1996 से 22 जुलाई 1999 तक जनता दल में रहते हुए उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था। दूसरी बार 28 मई 2004 से पांच अगस्त 2005 तक जनता दल सेक्युरल में रहते हुए। इसके बाद 2013 में जब पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बनी तो सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया। 
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