रायपुर में मतदान होना था। बात पिछले विधानसभा चुनाव की है। बाहर प्रत्याशियों के प्रतिनिधि ने मतदाताओं को बताया कि पहला बटन दबाना। मतदाता भीतर गए और पहला बटन दबा दिया। बाद में पता चला कि मशीन उल्टी रखी थी। 16 वां बटन नोटा का था। मशीन उल्टी रखी होने के कारण नोटा का बटन ही पहला बटन बन गया।...और नोटा का बटन दबता चला गया।
प्रत्याशी के खाते में वोट नहीं आए। चुनाव आयोग के अधिकारी बताते हैं कि यह मतदान केंद्र में भेजे गए कर्मचारियों की शरारत भी हो सकती है। बताते हैं इसके चलते ईवीएम मशीन बदनाम हो गई। सूत्र का कहना है कि इस बार ऐसी परिस्थितियों से बचने की कोशिश की गई है।
चुनाव आयोग ने दिया है ध्यान
मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत चुनाव की निष्पक्षता, भय रहित मतदान को लेकर लगातार संवेदनशील हैं। चुनाव आयुक्त ने तरह-तरह की फैलने वाली अफवाहों आदि के निदान पर भी पूरा ध्यान देने का निर्देश दिया है। चुनाव आयुक्त के कार्यालय का मानना है कि यदि मतदान में तैनात कर्मचारी पूरी तरह से प्रोटोकॉल का पालन करते हैं तो इस तरह की समस्या नहीं आएगी। इसे ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने सख्ती के साथ प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया है। चुनाव आयोग ने इसे केंद्र में रखकर प्रशिक्षण पर काफी ध्यान दिया है।
चुनाव में काम नहीं करना चाहते कर्मचारी
चुनाव आयुक्त के कार्यालय की राय भी यही है कि सरकारी कर्मचारी चुनाव के दौरान अपनी ड्यूटी को बोझ समझते हैं। वह इसे करना नहीं चाहते। विभिन्न विभागों से कुछ दिन की ड्यूटी पर आए कर्मचारी छठवां वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद से और भी रुचि नहीं ले रहे हैं। चुनाव आयोग के पास मतदान प्रक्रिया में तैनात कर्मचारियों को लेकर काफी शिकायतें आती हैं। बताते हैं इसकी जांच में तरह-तरह के तथ्य सामने आते हैं। इस समस्या का चुनाव आयोग के पास कोई सीधा समाधान भी नहीं है।