भारत माता की जय कहने से लेकर राष्ट्रगान तक पर बखेड़ा खड़ा करने वाले कट्टरपंथी वर्ग के लिए फिरदौस खान आइना के तौर पर देखी जा सकती हैं। वह कलाम को पढ़ती ही हैं, मंदिरों में घंटे-घड़ियाल और आरती के बीच भजनों पर जब सुर लगाती हैं तो लोग बरबस झूम जाते हैं।
उनका कहना है कि अल्लाह और भगवान राम-कृष्ण दोनों एक ही ऊपर वाले के ही नाम हैं। सिर्फ समझ का फेर है। किसी भी रूप में भगवान को याद कर लेना खुशकिस्मती होती है। महमूरगंज स्थित माहेश्वरी भवन में राधाष्टमी महोत्सव में भजन पेश करने पहुंचीं फिरदौस ने अमर उजाला से मजहबी माहौल पर खुलकर बात की।
सोनभद्र के पिपरी की रहने वाली फिरदौस फिलहाल वाराणसी में ही एक संस्थान में केंद्र प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं। फिरदौर राम, कृष्ण, शिव, पार्वती के भजन जब तल्लीन होकर गाती हैं तो फिर उनके भावों को देखते बनता है। उनका कहना है कि उन्हें किसी भी दरबार से बुलावा आता है तो वह वहां जाने से परहेज नहीं करतीं। मंदिरों में भजन गाने की उनके माता-पिता ने भी पूरी छूट दे रखी है। फिरदौस ने बताया कि वह हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी की सदस्य भी बन गई हैं।