आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से 15 सदस्यों को चुना गया। इनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मंत्रिमंडल से अलग होकर भारतीय जनसंघ की स्थापना की, तो संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर ने अनुसूचित जाति फेडरेशन की स्थापना की, जो बाद में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया कहलाई।
दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सपने को हकीकत बनाने में जुटा भारत आत्मनिर्भरता के सोपान पर जिस तेजी से चढ़ रहा है, उसके सतरंगी ख्वाब श्वेत-श्याम वाले जमाने में बुने गए थे। आजादी के बाद जश्न में डूबे भारतीयों की आकांक्षाओं और उम्मीदों को हकीकत में बदलने के लिए, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए विकास की नई कहानी लिखने की जरूरत थी। मजबूत लोकतंत्र की नींव रखनी थी। आजादी की खुशबू से उन्मुक्त भारत में 1951-52 में हुए पहले आम चुनाव ने उस परंपरा की नींव रखी, जिसमें जनता सर्वोपरि है। लोकतंत्र की वह नींव चुनाव दर चुनाव और मजबूत होती जा रही है। पहले चुनाव में प्रचार के दौरान गाड़ियों की रफ्तार के साथ बैलगाड़ियां भी कदम-ताल कर रही थीं। पुराने कांग्रेसी नई पार्टी बनाकर मैदान में थे। 489 सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने 364 सीटें जीतीं।
आंबेडकर और श्यामा प्रसाद ने बनाई नई पार्टी
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आजादी के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से 15 सदस्यों को चुना गया। इनमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मंत्रिमंडल से अलग होकर भारतीय जनसंघ की स्थापना की, तो संविधान निर्माता डॉ. आंबेडकर ने अनुसूचित जाति फेडरेशन की स्थापना की, जो बाद में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया कहलाई। कांग्रेसी जेबी कृपलानी ने किसान मजदूर प्रजा पार्टी का गठन किया, तो राम मनोहर लोहिया और जेपी नारायण ने सोशलिस्ट पार्टी बनाई।
आंबेडकर को करना पड़ा हार का सामना
पहले चुनाव में आश्चर्यजनक रूप से डॉ. भीमराव आंबडेकर को हार का सामना करना पड़ा था। उनकी आरक्षित सीट बॉम्बे से कांग्रेसी प्रत्याशी जीता था।
सियासी गणित
45% वोट के साथ कांग्रेस ने बनाई देश की पहली सरकार
45%कुल मतदान
17.3 करोड़ वोटर थे 1951-52 के प्रथम लोकसभा चुनाव में
10.6 करोड़ मतदाता यानी करीब 85 फीसदी नहीं थे साक्षर
1874 प्रत्याशी थे चुनावी मैदान में
38 सीटों पर 47 निर्दलीय उम्मीदवार
कांग्रेस को छोड़ सिर्फ दो पार्टियां ही पहुंच सकीं दहाई में
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी: 16 सीटें, 3.29% वोट मिले
आचार्य नरेंद्र देव, जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया के नेतृत्व वाली सोशलिस्ट पार्टी: 12 सीटें