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Rajasthan: सचिन पायलट की नई बगावत के पीछे क्या है कहानी, क्या राजस्थान की सियासत में होने वाला है बड़ा उलटफेर?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 11 Apr 2023 03:24 PM IST

सार

सवाल ये उठता है कि आखिर सचिन पायलट करना क्या चाहते हैं? क्या वाकई में चुनाव से ठीक पहले राजस्थान की सियासत में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है? आइए समझते हैं...  
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राजस्थान कांग्रेस में बगावत - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में चुनाव नजदीक है। इसके ठीक पहले सत्ताधारी कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट मंगलवार को अनशन पर बैठ गए। पार्टी की चेतावनी को भी पायलट ने यह कदम उठाया है। हालांकि, उनके रुख में कुछ बदलाव जरूर दिखा।  

पायलट क्यों बागी रुख अख्तियार करते दिख रहे हैं? सचिन पायलट का अगला कदम क्या होगा? एक तरफ वो अपनी पार्टी से बगावत कर रहे तो दूसरी ओर सूबे के मुख्य विपक्षी दल पर गंभीर आरोप लगा रहे। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि आखिर पायलट करना क्या चाहते हैं? क्या वाकई में चुनाव से ठीक पहले राजस्थान की सियासत में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है? आइए समझते हैं...  

 
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राजस्थान कांग्रेस में बगावत - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में चुनाव नजदीक है। इसके ठीक पहले सत्ताधारी कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट मंगलवार को अनशन पर बैठ गए। पार्टी की चेतावनी को भी पायलट ने यह कदम उठाया है। हालांकि, उनके रुख में कुछ बदलाव जरूर दिखा।  

पायलट क्यों बागी रुख अख्तियार करते दिख रहे हैं? सचिन पायलट का अगला कदम क्या होगा? एक तरफ वो अपनी पार्टी से बगावत कर रहे तो दूसरी ओर सूबे के मुख्य विपक्षी दल पर गंभीर आरोप लगा रहे। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि आखिर पायलट करना क्या चाहते हैं? क्या वाकई में चुनाव से ठीक पहले राजस्थान की सियासत में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है? आइए समझते हैं...  
 

पहले जानिए आखिर क्यों अनशन पर बैठे पायलट? 
सचिन पायलट ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच मिलीभगत के आरोप लगाए। पायलट ने आरोप लगाया कि वसुंधरा सरकार के दौरान कई घोटाले हुए थे। उन्होंने इसकी जांच की मांग को लेकर दो बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी को लेकर पायलट ने अनशन करने का एलान किया। 



हालांकि, पायलट के एलान के बाद राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पत्र जारी कर कहा कि सरकार के खिलाफ इस तरह के कदम को अनुशासन हीनता माना जाएगा। रंधावा की चेतावनी के बाद पायलट के अनशन के मंच में उनके एलान जैसी तस्वीरें नहीं दिखीं। अनशन के दौरान लगे बैनर पर लिखा गया, ‘वसुंधरा सरकार में हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध अनशन’। बैनर पर सिर्फ महात्मा गांधी की फोटो रखी गई।   
 

रंधावा के खत में क्या था?
रंधावा के खत में कहा गया कि सचिन पायलट का अनशन पार्टी हितों के खिलाफ है। अगर सरकार के साथ उनके कुछ इश्यू हैं, तो उन्हें पार्टी फोरम पर डिस्कस किया जा सकता है, लेकिन उसे मीडिया और जनता के बीच ले जाना ठीक नहीं है। मैं पिछले पांच महीने से राजस्थान प्रभारी हूं, लेकिन सचिन पायलट ने जो मुद्दा उठाया है, उसकी चर्चा मुझसे कभी नहीं की। मैं उनके संपर्क में हूं और अभी भी यह अपील करता हूं कि सचिन पायलट को शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करनी चाहिए, क्योंकि इसमें कोई विवाद नहीं है कि वह पार्टी के एसेट हैं।
 

तो सचिन पायलट क्या करने की कोशिश कर रहे?
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'नवंबर-दिसंबर तक राजस्थान में चुनाव होने हैं। अभी सात से आठ महीने बचे हुए हैं। ऐसे में सचिन पायलट का ये कदम कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ा करने वाला है।'  प्रो. सिंह ने पायलट के इस कदम के पीछे तीन कारण होने की बात कही..  

1. अपना कद बढ़ाने की कोशिश: ये एक संभावना है, क्योंकि इसके पहले भी वह तीन बार ऐसा कर चुके हैं। 2018 में जब राजस्थान के अंदर कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब से लेकर अब तक पायलट के बगावत की कई बार खबरें आ चुकी हैं। एक बार तो पायलट अपने समर्थक करीब 20 विधायकों के साथ दिल्ली में डेरा भी डाल चुके हैं। तब उनपर पार्टी ने कार्रवाई करते हुए सभी पदों से हटा दिया था। डिप्टी सीएम का पद भी गहलोत सरकार ने ले लिया था। ऐसे में पायलट ये जानते हैं कि इस बार जब वह बगावत कर रहे हैं तो इसका नतीजा काफी अलग हो सकता है। मसलन उन्हें पार्टी से निष्कासित भी किया जा सकता है। ऐसे में ये भी संभावना है कि पायलट खुद ऐसा चाहते हों। 

 

2. खुद शहीद होकर नया मोर्चा बनाने की कोशिश: इसकी संभावना सबसे ज्यादा दिख रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि सचिन पायलट जिन आरोपों को लेकर अनशन पर बैठ रहे हैं, वो उन्होंने भाजपा की पिछली सरकार पर ही लगाए हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि वह न तो कांग्रेस में रहना चाहते हैं और न ही भाजपा में जाना चाहते हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि पायलट राजस्थान में नया मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह खुद की नई पार्टी बना सकते हैं। पायलट युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। ऐसा करके वह उन वोटर्स को साधना चाहते हैं जो कांग्रेस और भाजपा दोनों से ही नाखुश है। अगर सफल हुए तो भले ही अकेले दम पर पायलट सरकार न बना सकें, लेकिन किंगमेकर की भूमिका में जरूर उभर सकते हैं। 

 

3. कांग्रेस पर भी उठ जाएंगे सवाल: अगर भाजपा सरकार के खिलाफ जांच की मांग को लेकर अनशन पर बैठे सचिन पायलट पर कांग्रेस कार्रवाई करती है तो भी कई सवाल खड़े होंगे। सचिन पायलट लोगों को ये कहेंगे कि भाजपा और कांग्रेस मिली हुई हैं। यही कारण है कि उन्हें भाजपा सरकार के भ्रष्टाचारों के खिलाफ जांच की मांग उठाने पर पार्टी से निकाल दिया गया। ऐसा कहकर सचिन जहां कांग्रेस पर सवाल खड़े करेंगे, वहीं भाजपा को भी घेरेंगे। 
 

पायलट पर क्या कार्रवाई हो सकती है? 
इसे जानने के लिए हमने कांग्रेस के दो बड़े नेताओं से बात की। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. उदित राज कहते हैं, 'ये समय राहुल गांधी की सजा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का है। ऐसे समय पायलट का ये कदम घातक है। इस वक्त विपक्ष के 18 दल राहुल गांधी के साथ हैं। ऐसे में सचिन पायलट का पार्टी विरोधी काम राष्ट्रीय नेतृत्व और भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे हमारे अभियान को कमजोर करेगा।'

पायलट की कार्रवाई पर डॉ. उदित कहते हैं कि इस पर पार्टी को फैसला लेना है। वहीं, कांग्रेस के एक दूसरे राष्ट्रीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, 'सचिन पायलट लगातार पार्टी में रहते हुए कांग्रेस को कमजोर करने में जुटे हैं। अब चुनाव नजदीक है। ऐसे में पायलट की इन हरकतों का कड़ा जवाब देना जरूरी है।'

कांग्रेस नेता आगे कहते हैं कि सचिन पायलट को लेकर पार्टी में दो राय है। पहला ये कि उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए और दूसरा उन्हें राजस्थान की कमान सौंप दी जाए। लेकिन अब पायलट के अनशन के बाद काफी हद तक उनपर कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
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