रोहिथ की जाति को लेकर नया विवाद पैदा हो गया
रोहित वेमुला की जाति को लेकर नया विवाद पैदा हो गया है। अब गुंटुर जिले के कलेक्टर कांतिलाल डांडे ने कहा है कि रोहित की जाति को लेकर तस्वीर साफ नहीं है और उसकी जांच कराए जाने की जरूरत है।
गौरतलब है कि उन्हीं के दफ्तर ने रोहित को पहले दलित बताया था। डांडे ने बताया की रोहित को लेकर पहले हुई दो जांच रिपोर्टों में से दोनों में उसे अलग-अलग जाति का बताया गया है। जहां गुंटुर की जांच में उसे दलित बताया गया है। वहीं गुरजाला की जांच में वह पिछड़ी जाति का बताया गया है।
रोहित का जन्म गुंटुर में हुआ था, तो उसके पिता गुरजाला से थे। एनसीएससी तक पहली जांच की रिपोर्ट ही पहुंची है जिसमें उसे दलित बताया गया था। रोहित की सही जाति का पता लगाना महत्वपूर्ण है क्योंकि दलित कार्यकर्ताओं का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री बंदारू दंत्तात्रेय और हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अप्पा राव ने रोहित को आत्महत्या के लिए उकसाया था और वह एससी/एसटी एक्ट में दोषी हैं।
उन्होंने कहा कि जहां बंदारू ने एचआरडी मंत्रालय को खत लिखकर आंदोलन करके छात्रों को एंटी नेशनल करार देने की बात कही थी, वहीं वीसी अप्पा राव ने छात्रों की मांगों को अनदेखा कर दिया था। साथ ही छात्रों को मिल रही 25000 रुपए प्रति माह की फेलोशिप पर भी रोक लगा दी थी।
न ही बंदारू और न ही राव से अबतक इस मामले में पूछताछ की गयी है क्योंकि पुलिस के पास रोहित की जाति का प्रमाण पत्र गुंटुर के कलेक्टर के पास से अबतक नहीं पहुंचा है। वहीं डांडे का कहना है कि उसकी जाति को लेकर इतने दावे किए जा रहे हैं कि उन्हें अपनी रिपोर्ट की फिर से जांच करनी पड़ेगी।