सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है जिस पर राज्य केवल एक कानून द्वारा उचित प्रतिबंध लगा सकता है, न कि एक कार्यकारी निर्देश द्वारा। शीर्ष अदालत का महत्वपूर्ण फैसला फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) द्वारा दायर अपीलों के एक बैच पर आया, जिसमें छत्तीसगढ़, दिल्ली और कर्नाटक के उच्च न्यायालयों के तीन समान लेकिन अलग-अलग फैसलों को चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालयों ने देश में नए फार्मेसी कॉलेज खोलने पर रोक लगाने वाले पीसीआई के 17 जुलाई और 9 सितंबर के प्रस्तावों के खिलाफ कई फार्मेसी संस्थानों की याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था। न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा और इन निर्णयों पर पीसीआई की अपील को खारिज करते हुए कहा कि नए फार्मेसी कॉलेज खोलने पर प्रतिबंध लगाने के अधिकार का प्रयोग केवल एक कार्यकारी कार्रवाई से नहीं किया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने कहा, हालांकि शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का मौलिक अधिकार है, यह उचित प्रतिबंधों के अधीन हो सकता है, जो सामान्य जनहित में आवश्यक पाए जाते हैं। ऐसे अधिकार पर उचित प्रतिबंध केवल एक कानून द्वारा लगाया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि कर्नाटक, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालयों द्वारा लिया गया विचार कानून की सही स्थिति बताता है। फैसले में कहा गया है कि कार्यकारी निर्देशों का इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना के मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं किया जा सकता है। पीसीआई की अपील को इस संक्षिप्त आधार पर खारिज किया जा सकता है। इस तरह के प्रतिबंध व्यापक आम जनहित में हो सकते हैं। हालांकि, अगर ऐसा करना है, तो इसे कानून के अनुसार सख्ती से करना होगा।