केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि द्रमुक चुनावी फायदे के लिए नरेंद्र मोदी सरकार, हिंदी भाषा और परिसीमन के खिलाफ झूठ फैला रही है, जबकि केंद्र इस मुद्दे पर सभी पक्षों से चर्चा कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री जी.किशन रेड्डी ने रविवार को केंद्र सरकार पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि स्टालिन का यह कहना कि नरेंद्र मोदी सरकार दक्षिण भारत के साथ अन्याय कर रही है और परिसीमन पर बैठक आयोजित कर रही है, पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है।
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'जनता को भड़काने की कोशिश कर रही द्रमुक'
रेड्डी ने कहा कि तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के करीब आने पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) राज्य सरकार और स्टालिन परिवाार के कथित भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ बढ़ते असंतोष से बचने के लिए एक नया तरीका अपनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में भ्रष्टाचार, भारी करों, बिजली दरों में बढ़ोतरी और चुनावी वादों के पूरे न होने के बीच द्रमुक सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हिंदी और परिसीमन को शत्रु के रूप में दिखाकर जनता को भड़काने की कोशिश कर रही है।
'कांग्रेस सरकार में द्रमुक ने नहीं किया शिक्षा नीति का विरोध'
उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक अपने नेताओं पर शराब आपूर्ति से जुड़े हालिया आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जब केंद्र कांग्रेस सरकार ने 1986 में शिक्षा नीति का पेश की थी, तब द्रमुक ने इसका विरोध नहीं किया था। इसके अलावा, कांग्रेस सरकार में बनाए गए कोठारी आयोग ने भी तीन भाषा के फॉर्मूले का समर्थन किया था।
'चुनाव आते ही झूठ फैलाने लगते हैं द्रमुक और कांग्रेस'
मंत्री ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने देशभर में सभी क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं और यह पहली सरकार है जो मातृभाषा में पढ़ाई को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक और कांग्रेस चुनाव करीब आते ही झूठ फैलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने स्टालिन की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परिसीमन के दौरान लोकसभा सीटों की संख्या घटने को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है, क्योंकि जनगणना अभी तक नहीं हुई है। केंद्र इस मामले पर सभी पक्षों से चर्चा कर रहा है।