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जब कश्मीर में आतंकियों से लड़ रहे एसएसबी के कंट्रोल रूम से आवाज निकलती है...हैप्पी बर्थ-डे टू यू

Tue, 25 Sep 2018 05:20 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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कश्मीर घाटी में यही देखने सुनने को मिलता है कि गोली यहां से गई, वहां से गई। कान को छूती हुई निकल गई। जवानों के तीज-त्यौहार आतंकवादियों के हमलों के बीच कब निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। खैर, इन सबके बीच एक सुखद समाचार भी है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने अपने जवानों का हैप्पी बर्थ-डे एक नए अंदाज में मनाना शुरू कर दिया है। जिस जवान का बर्थ-डे होता है, उस दिन बाकायदा कंट्रोल रूम से यह एलान होता है कि आज फलां जवान का जन्मदिन है, उसे कंपनी कमांडर, बटालियन कमांडर या दूसरे समकक्ष अधिकारी की ओर से बधाई-शुभकामनाएं दी जाती हैं। यह एलान सभी वाकी-टाकी, रेडियो या वहां संचार का कोई दूसरा साधन है तो उस पर सुनाई देता है। जवानों का मनोबल बरकरार रखने के लिए श्रीनगर (कश्मीर) में तैनात एसएसबी ने यह पहल की है।

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श्रीनगर में पिछले चार साल से तैनात (दो वर्ष अपनी इच्छानुसार) स्पेशल आॅपरेशन सेक्टर के डीआईजी राजेंद्र बूमला ने जवानों का जन्मदिन मनाने की शुरुआत की है। संभवता देश के सभी अर्धसैनिक बलों में यह पहल केवल श्रीनगर सेक्टर में हुई है। डीआईजी राजेंद्र का कहना है कि इस सेक्टर में करीब 13-14 हजार जवान हैं। जवानों की आवाजाही के कारण यह संख्या घटती बढ़ती रहती है। यहां पर तैनात जवान अपने परिवार से बहुत दूर होते हैं। 

खासतौर पर जब उनका अपना जन्मदिन होता है तो वे भले ही किसी से न कहें, लेकिन उनके चेहरे की उदासी बहुत कुछ बयां कर देती थी। लिहाजा ऐसी तैनाती पर हर जवान को उनके जन्मदिन की छुट्टी देना संभव नहीं होता, इसलिए हमने यहीं पर उनका हैप्पी बर्थ-डे मनाने का फैसला किया है।
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बड़े अफसर के सामने वाली कुर्सी पर बैठता है बर्थ-डे ब्वाय

जिस जवान का बर्थ-डे होता है, उसकी सूचना कंट्रोल रूम से सभी को मिल जाती है। कमांडर की बधाई मिलने के बाद दूसरे जूनियर-सीनियर अधिकारी बर्थ-डे ब्वाय के पास आकर उसे शुभकामनाएं देते हैं। इसके बाद यूनिट में जो भी सर्वोच्च अधिकारी होता है, बर्थ-डे ब्वाय उसके दफ्तर में जाता है, उसे बॉस के सामने वाली कुर्सी पर बैठाया जाता है। केक कटता है और बॉस उसे प्यार की झप्पी देता है। जवान को मिठाई और यादगार के लिए एक मोमेंटो भी दिया जाता है। इसके बाद उसे हल्की ड्यूटी पर भेजा जाता है। शाम को छुट्टी भी जल्द दे देते हैं, ताकि वह अपने सहकर्मियों के साथ जन्मदिन का जश्न मना सके। 

डीआईजी बताते हैं कि इस पहल के नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं। जवान पहले से कहीं ज्यादा उत्साह और मनोबल से डयूटी देता है। अब दूसरे जवान भी अपने जन्मदिन का बेसब्री से इंतजार करने लगे हैं। बता दें कि बड़ी संख्या में जवानों द्वारा नौकरी छोड़ने की घटनाओं के बाद गृह मंत्रालय ने सभी बलों के अफसरों को जवानों के साथ अच्छे से पेश आने, अविलंब समस्या सुलझाने और उनका मनोबल बनाए रखने के लिए नए-नए तरीके अपनाने का आदेश जारी कर रखा है। यह दूसरी बात है कि अन्य बलों में अभी इस तरह की मुहिम शुरू नहीं हो सकी है।

2014-16 के दौरान अर्धसैनिक बलों से स्वैच्छिक सेवनिवृत्ति या त्यागपत्र देने वालों का आँकड़ा     
                         
बल    राजपत्रित अधिकारी  अधीनस्थ अधिकारी   अन्य रैंक
सीआरपीएफ   136        1082     5941  
बीएसएफ   128        784   6031
आईटीबीपी  29           196   1690
एसएसबी  55           217   631
सीआईएसएफ  43       831   1949
असम राइफल    10         43     756 

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