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Srinagar Terror Attack: क्या जेवन में पुलवामा जैसे हमले की साजिश थी? संसद हमले की बरसी पर आतंकियों ने की कायराना हरकत

Mon, 13 Dec 2021 10:02 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आतंकियों ने यह हमला 20 साल पहले संसद हमले की बरसी वाले दिन ही किया है। क्या आतंकी पुलवामा जैसे हमले को अंजाम देना चाहते थे?
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Srinagar Terrorist Attack - फोटो : ANI
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आतंकियों ने एक बार फिर सोमवार को कायराना हरकरत को अंजाम दिया है। श्रीनगर के बाहरी इलाके जेवन में आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की बस को निशाना बनाते हुए फायरिंग की जिसमें दो जवान शहीद हो गए और 12 गंभीर रूप से घायल हो गए। गौर करने लायक बात है कि आतंकियों ने यह हमला 20 साल पहले संसद हमले की बरसी के दिन ही किया। 

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ठीक 20 साल पहले 13 दिसंबर 2001 को संसद हमला 
आज से ठीक बीस साल पहले 13 दिसंबर 2001 को सुबह संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो चुका था। विपक्षी सांसद ताबूत घोटाले को लेकर राज्यसभा और लोकसभा में हंगामा कर रहे थे। सदन को 45 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी संसद से घर की ओर जा चुके थे। हालांकि, तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत अन्य सांसद संसद में ही मौजूद थे। तभी सफेद एंबेसडर कार से जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकी संसद भवन परिसर में पहुंचे। एक आतंकी ने संसद भवन के गेट पर ही खुद को बम से उड़ा लिया। इससे यहां भारी अफरातफरी का माहौल बन गया। आतंकियों का मुकाबला करने के लिए सुरक्षाबल मोर्चे पर जुट गए। दोनों तरफ से गोलीबारी होने लगी। 

संसद भवन पर हुए इस हमले में सुरक्षाबलों ने सभी आतंकियों को मार गिराया था। हमले में कांस्टेबल कमलेश कुमारी यादव शहीद हुईं। इसके बाद संसद का एक माली, दो सुरक्षाकर्मी और दिल्ली पुलिस के छह जवान भी शहीद हो गए थे। इस आतंकी हमले के पीछे मोहम्मद अफजल गुरु, एसए आर गिलानी और शौकत हुसैन समेत पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई शामिल थे। 12 साल बाद नौ फरवरी 2013 को अफजल गुरु को फांसी दे दी गई थी। 
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14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमला 
14 फरवरी 2019 को दोपहर करीब 3.30 बजे जम्मू से श्रीनगर जा रहे सीआरपीएफ के काफिले को विस्फोटक से भरी एसयूवी से निशाना बनाया गया था। इस हमले में 40 जवान शहीद हुए थे। घटना से पूरा देश सदमे में आ गया था। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर हमलावर ने विस्फोटक भरी कार से सीआरपीएफ काफिले की बस को टक्कर मार दी थी। धमाका इतना भयंकर था कि बस के परखच्चे उड़ गए थे। इसके बाद घात लगाए आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग भी की थी। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। जांच के बाद पता चला कि इस हमले को अंजाम दिया था 20 साल के युवक आदिल अहमद डार ने। 


कश्मीर में जवानों पर हुआ तीन दशक का ये सबसे बड़ा हमला था। जैश ए मोहम्मद द्वारा अंजाम दिए गए इस हमले ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया था। हमले को अंजाम देने वाला था 20 साल का आदिल अहमद डार जिसने 350 किलो विस्फोटक से भरी एसयूवी को सीआरपीएफ के काफिले से टकरा दिया था।  

हमलावर ने काफिले की एक बस को निशाना बनाया जिसमें 35-40 जवान सवार थे। काफिले में 78 गाड़ियां शामिल थीं। इस हमले में 40 जवानों की मौत हुई थी। पूरा देश जवानों की शहादत से भावुक और हमले से आक्रोशित था। आतंकियों और उनके आकाओं से बदले की मांग उठने लगी। हमले के खिलाफ पूरा देश और राजनीतिक दल एकजुट थे। एक सुर में पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों को सबक सिखाए जाने की मांग उठी थी। पूरे विश्व ने इस हमले की निंदा की थी।  
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