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Sri Lanka Crisis: आईएमएफ के कर्ज से क्या संभल जाएगी श्रीलंका की अर्थव्यवस्था? जानें सभी समीकरण

Mon, 20 Mar 2023 09:23 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलंबो

सार

पिछले महीने श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ कर 2.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। इसमें बड़ी भूमिका विदेशों से कमा कर भेजी गई रकम की थी। लेकिन इतनी विदेशी मुद्रा देश की जरूरत के लिए काफी नहीं है।
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Sri Lanka Economic Crisis - फोटो : Istock
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विस्तार
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श्रीलंका में लोगों की निगाहें आईएमएफ एग्जीक्यूटिव बोर्ड की बैठक पर टिकी हैँ। उम्मीद है कि इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) श्रीलंका के लिए 2.9 बिलियन डॉलर की मंजूर कर्ज को जारी करने का फैसला ले सकता है। अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इतनी रकम श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए काफी होगी? 

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वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूटट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस में उप मुख्य अर्थशास्त्री सर्गी लनाउ ने कहा है कि जब तक जरूरी चीजों के आयात के लिए अतिरिक्त डॉलर प्राप्त नहीं होंगे, आर्थिक स्थिति में सुधार संभव नहीं है। आईएमएफ के ऋण से अतिरिक्त डॉलर खजाने में आएंगे। मध्य अवधि में आईएमएफ प्रोग्राम के तहत सुधारों पर अमल और डेट रिस्ट्रक्चरिंग (ऋण चुकाने की समयसारणी के पुननिर्धारण) से श्रीलंका की आर्थिक स्थिति को लेकर आम नजरिया बदल सकता है।

पिछले महीने श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ कर 2.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। इसमें बड़ी भूमिका विदेशों से कमा कर भेजी गई रकम की थी। लेकिन इतनी विदेशी मुद्रा देश की जरूरत के लिए काफी नहीं है। अमेरिकी थिंक टैंक डिलॉइल इकॉनमिक्स इंस्टीट्यूट से जुड़े अर्थशास्त्री तलाल रफी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि अतिरिक्त डॉलर आने से श्रीलंका के लिए दूसरी बहुपक्षीय संस्थाओं से ऋण लेने में आसानी होगी। इन संस्थाओं में विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक शामिल हैं। साथ द्विपक्षीय कर्ज मिलना भी आसान हो जाएगा।
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तलाल रफी ने कहा कि आईएमएफ की मंजूरी से दुनिया के सामने यह प्रमाणित होगा कि श्रीलंका सही रास्ते पर है।’ लेकिन रफी ने आगाह किया है कि अभी सिर्फ शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा- आगे जो सुधार करने हैं, उनका रास्ता आसान नहीं है। 

कोलंबो स्थित थिंक टैंक एडवोकेटा इंस्टीट्यूट के चीफ एग्जिक्यूटिव धननाथ फर्नांडो ने कहा है कि श्रीलंका के पुराने के रिकॉर्ड को देखते हुए भविष्य को लेकर भरोसा नहीं बंधता। उन्होंने कहा कि अतीत में हम 16 बार आईएमएफ के पास गए थे, लेकिन तब हमारे कर्ज चुकाने की क्षमता कायम थी। जबकि इस बार ऋण चुका पाने को लेकर भरोसा मजबूत नहीं है। हमें आर्थिक वृद्धि की जरूरत है, ताकि हम इस समस्या से निकल सकेँ। आर्थिक वृद्धि तभी होगी, जब हम आर्थिक सुधारों को लागू कर पाएं।

आईएमएफ प्रोग्राम के तहत सबसे ज्यादा ध्यान श्रीलंका के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों पर है, जिनमें कई गहरे घाटे में हैं। श्रीलंका एयरलाइन्स का इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में घाटा साढ़े 29 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। रफी ने कहा कि श्रीलंका के सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की तनख्वाह और पेंशन पर सरकार 86 प्रतिशत राजस्व खर्च हो जाता है।

दूसरे विश्लेषकों की भी राय है कि श्रीलंका सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र में सुधार लागू करने होंगे। फर्नांडो ने कहा कि अतीत में सरकारों ने सुधार लागू करने का वादा तो किया, लेकिन फिर कदम वापस खींच लिए। अब रानिल विक्रमसिंघे की सरकार अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कर रही है, तो उसके सामने इससे जुड़े सवाल मौजूद हैं। 

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