श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों का विरोध लगातार जारी है। इस बार सभी प्रदर्शनकारी आर-पार के मूड में दिख रहे हैं और राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के घरों में डेरा डाले हुए हैं। इन सभी का कहना है कि जब तक हमारी मांगें नहीं मान ली जाती तब तक हम लोग यहां से हटने वाले नहीं है। इन सबके बीच भारत ने एक बार फिर श्रीलंका के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में कहा है कि श्रीलंका की मदद के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।
भारत मदद के लिए प्रतिबद्ध
एस जयशंकर ने यहा कहा कि श्रीलंका की स्थिति संवेदनशील और जटिल है। हमारा समर्थन श्रीलंका के लोगों के लिए है क्योंकि वे हमारे पड़ोसी हैं। हम उनके जीवन के बहुत कठिन दौर से गुजरने में उनकी मदद करना चाहते हैं। गौरतलब है कि श्रीलंका में आर्थिक संकट के बीच भारत ने पड़ोसी की मदद जारी रखी है। भारत की तरफ से हाल ही में श्रीलंका को 44 हजार मीट्रिक टन यूरिया भेजा गया है।
एलएसी को लेकर दिया बयान
श्रीलंका संकट के साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को चीन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा भारत का हमेशा से यही रुख रहा है और हम हमेशा से इसी पर अडिग हैं। उन्होंने ये प्रतिक्रिया कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक ट्वीट पर दी। दरअसल, राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि भारतीय क्षेत्र में 'चीनी घुसपैठ बढ़ रही है।'
राहुल गांधी के ट्वीट को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि वे इस तरह के ट्वीट पहले भी करते रहे हैं, उनके ट्वीट में मुझे कुछ खास नया नहीं लगा। अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा कि ये बात सब लोगों को पता है कि 1962 में चीनियों ने लद्दाख सहित एक बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था। इसलिए भी ये समस्या है।
दोनों पक्षों के बीच चल रही है वार्ता
मंत्री ने कहा कि फिलहाल दोनों पक्षों के बीच सैन्य कमांडरों और राजनयिकों के माध्यम से बातचीत चल रही है। मैंने खुद चीनी विदेश मंत्री के साथ इस मुद्दे को उठाया जब मैं उनसे बाली (जी 20 विदेश मंत्रियों की बैठक) में मिला था। इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या चीन-पाकिस्तान समुद्री अभ्यास से भारतीय समुद्री सुरक्षा को खतरा है? तो उन्होंने कहा कि सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है और यह देश की विदेश नीति में सबसे ऊपर है।
अरब देशों से हमारे बेहतर संबंध
इस दौरान भाजपा से निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी पर जयशंकर ने कहा कि शुरुआत में अरब देशों के बीच कुछ चिंता थी, लेकिन जब भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया, तो उन्होंने सच्चाई देखी। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं और उन्हें हमारी सरकार पर भरोसा है।
तीन दिवसीय यात्रा पर केरल की राजधानी पहुंचने के बाद तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए, जयशंकर ने कहा था कि हम श्रीलंका का बहुत समर्थन करते रहे हैं। हम मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और जिस बात को लेकर वहां के नागरिक चिंतित हैं उसके लिए हमारी सरकार हमेशा खडी़ रहेगी । वे अभी अपनी समस्याओं के माध्यम से काम कर रहे हैं, इसलिए हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा कि वे क्या करते हैं। वहीं जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या कोई शरणार्थी संकट भी है वहां, तो जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा अभी कोई शरणार्थी संकट नहीं है।
संसद 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चुनाव
श्रीलंका की संसद 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चुनाव करेगी। स्पीकर महिंदा यापा अबेवर्दने ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। अबेवर्दने ने एक बयान में कहा कि संसद शुक्रवार को फिर से बुलाई जाएगी और पांच दिन बाद नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान करेगी। इससे पहले, श्रीलंका के मुख्य विपक्षी दल समागी जाना बालवेगया (एसजेबी) ने सोमवार को सर्वसम्मति से साजिथ प्रेमदासा को अंतरिम राष्ट्रपति पद के लिए नामित करने का फैसला किया है। वहीं श्रीलंका की संसद में 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चुनाव होगा।