अक्षय कुमार की मशहूर फिल्म 'स्पेशल 26' की तर्ज पर मुंबई के अंधेरी इलाके में एक कंपनी पर फर्जी इनकम टैक्स रेड डालने का मामला सामने आया है। पुलिस ने दो दिन पहले नकली इंस्पेक्टरों के साथ-साथ दो असली इनकम टैक्स इंस्पेक्टरों- सुरेशकुमार मिश्रा और सुनील गोरे को भी गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इन असली इंस्पेक्टरों ने 'स्पेशल 26' की तर्ज पर रेड डालने के लिए अपने दफ्तर से बाकायदा आधिकारिक छुट्टी ली थी और नकली इंस्पेक्टरों को असली दिखने की ट्रेनिंग भी दी थी। इतना ही नहीं, अंधेरी की इस वारदात से पहले यह गैंग ठाणे के मानपाड़ा में भी इसी तरह फर्जी छापा मारकर 65 लाख रुपये ऐंठ चुका था।
मामले की जांच कर रही अंधेरी पुलिस ने दोनों इंस्पेक्टरों के दावों की सच्चाई परखने के लिए उनके दफ्तरों को पत्र लिखा है। आरोपी सुरेशकुमार मिश्रा लालबाग स्थित पीरामल चेम्बर्स में तैनात था, जबकि सुनील गोरे बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के कौटिल्य भवन स्थित इनकम टैक्स ऑफिस में पदस्थ था। पुलिस दोनों दफ्तरों के अटेंडेंस रजिस्टर को कब्जे में लेकर यह जांच कर रही है कि क्या इन दोनों ने सचमुच रेड वाले दिन (17 जुलाई) छुट्टी ली थी और इससे पहले ली गई छुट्टियों के दौरान इनकी गतिविधियां क्या थीं। इसके अलावा, पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस गैंग ने अतीत में और कितनी जगह इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।
अंधेरी वाले केस में पूरी साजिश का मास्टरमाइंड शिकायतकर्ता बिजनेसमैन राजकुमार कंडासामी का पूर्व ड्राइवर संतोष खोपटकर था। कंडासामी की चाकाला (अंधेरी) में 'टू-एम-ऑप्थोट्रोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम से कंपनी है। कुछ समय पहले कहासुनी के बाद कंडासामी ने संतोष को नौकरी से निकाल दिया था। इसी रंजिश और मालिक के पैसों की अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर संतोष ने आयकर अधिकारियों और अन्य साथियों के साथ मिलकर लूट का यह ताना-बाना बुना। इस केस में पुलिस अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
17 जुलाई की सुबह वारदात को अंजाम देने के लिए यह फर्जी टीम अंधेरी स्थित दफ्तर पहुंची। सादे कपड़ों में आए दो आरोपियों ने कंडासामी के घर के पास उन्हें और उनकी पत्नी को घेरा, खुद को इनकम टैक्स अफसर बताकर आईकार्ड दिखाया और जबरन कैब में बिठाकर दफ्तर ले आए। वहां मौजूद कर्मचारियों के मोबाइल जब्त कर लिए गए और एक फर्जी सर्च वारंट पर कंडासामी से दस्तखत करवा लिए गए।
इसके बाद कंडासामी पर नकद लेनदेन का आरोप लगाते हुए 1.44 करोड़ रुपये का जुर्माना बनने की बात कही गई। आरोपियों ने मामला रफा-दफा करने के लिए तुरंत 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी और पैसे न देने पर तुरंत गिरफ्तार करने की धमकी दी।
लेकिन कंडासामी ने हिम्मत दिखाई और साफ कह दिया कि वे बिना आधिकारिक कानूनी नोटिस और अथॉरिटी लेटर के एक भी रुपया नकद नहीं देंगे तथा जो भी भुगतान होगा, वह सीधे विभाग को किया जाएगा। जब आरोपी कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं कर सके और व्यापारी अपने रुख पर अड़ा रहा, तो फर्जी टीम करीब तीन घंटे तक नाटक करने के बाद खाली हाथ लौट गई।
इसके बाद कंडासामी ने अपने सीए से संपर्क किया तो पता चला कि इनकम टैक्स विभाग ने ऐसी किसी रेड का आदेश ही नहीं दिया था। इसके बाद पुलिस में किडनैपिंग, उगाही और आपराधिक साजिश की एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके बाद कई हफ्तों की जांच के बाद ये आरोपी पकड़े गए।