समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा ने ममता बनर्जी पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार स्वीकार न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता ने तृणमूल कांग्रेस को नकार दिया है। नंदा ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव का ममता के समर्थन में खड़ा होना विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक मजबूरी थी।
समाजवादी पार्टी (एसपी) के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उनके बयान के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी के बीच दूरी बढ़ रही है। कोलकाता में सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए एसपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद किरणमय नंदा ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जनता ने तृणमूल कांग्रेस को नकार दिया, लेकिन ममता बनर्जी अभी भी इस हार को स्वीकार करने के बजाय 'इनकार की राजनीति' कर रही हैं।
‘जनता ने टीएमसी को नकारा’
किरणमय नंदा ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता नहीं चाहती थी कि तृणमूल कांग्रेस दोबारा सत्ता में आए। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी खुद भी चुनाव हार गईं, लेकिन उन्होंने अपनी हार को सम्मानपूर्वक स्वीकार नहीं किया। नंदा के अनुसार, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश मतदाताओं ने भी इस बार उन्हें समर्थन नहीं दिया।
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चुनाव परिणाम के बाद अखिलेश ने की थी मुलाकात
दिलचस्प बात यह है कि 4 मई को पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम आने के बाद अखिलेश यादव कोलकाता पहुंचे थे और ममता बनर्जी के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। उस समय उन्होंने ममता बनर्जी के इस आरोप का समर्थन किया था कि भाजपा और चुनाव आयोग की कथित साजिश के कारण तृणमूल कांग्रेस को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
अखिलेश का समर्थन था राजनीतिक मजबूरी?
हालांकि, किरणमय नंदा ने अब इस समर्थन की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का वह कदम राजनीतिक मजबूरियों के कारण था, क्योंकि दोनों दल विपक्षी गठबंधन INDIA का हिस्सा रहे हैं। नंदा ने कहा कि वास्तविकता यह है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने इस बार तृणमूल कांग्रेस को पूरी तरह खारिज कर दिया है। किरणमय नंदा का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह कभी पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार में मत्स्य मंत्री रह चुके हैं। उस समय समाजवादी पार्टी वाम मोर्चे का हिस्सा थी। बाद में 2011 में वाम मोर्चा सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद नंदा ने अपना राजनीतिक केंद्र लखनऊ बना लिया और समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद भी बने।
अखिलेश-ममता के रिश्तों में दूरी के संकेत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किरणमय नंदा के इस बयान से विपक्षी दलों के बीच संबंधों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के राजनीतिक रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर अभी तक न तो अखिलेश यादव और न ही ममता बनर्जी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।