कांग्रेस के भविष्य के लिए राहुल चिंतित
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को बताया कि जब दिल्ली में यूपी के नेताओं से राहुल गांधी की बातचीत हुई थी, उसी समय राहुल गांधी ने यह बात कह दी थी कि यदि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन होता है और गठबंधन में रहकर 15-20 सीटों पर लड़कर कांग्रेस चार-पांच सीटें जीत भी लेती है, तो इससे पार्टी का भविष्य उज्जवल नहीं होगा। राहुल के अनुसार, भविष्य में पार्टी को मजबूत करने के लिए उसे रणनीति बनाकर लंबे समय तक उस पर काम करना होगा।
राहुल गांधी पार्टी का आधार मजबूत करने की बात करते रहे हैं, लेकिन सपा जिस तरह से सीटों का बंटवारा कर रही थी, उससे कांग्रेस का कोई उद्देश्य हल नहीं हो रहा था। न तो पार्टी को ज्यादा सीटें ही मिल रही थीं, न ही उसका आधार मजबूत हो रहा था। यही कारण है कि गठबंधन के टूटने का खतरा पैदा हो गया था।
दो विकल्प बचे थे
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अखिलेश यादव ने उनके सामने दो विकल्प छोड़े थे। एक- वे उनकी दी हुई कमजोर सीटों पर लड़ें और हार जाएं। इससे पार्टी की रही सही ताकत भी समाप्त हो जाएगी। इससे पार्टी के सामने यूपी में हमेशा के लिए समाप्त हो जाने का खतरा पैदा हो सकता था। पिछली बार सोनिया गांधी ने रायबरेली की सीट जीत ली थी। लेकिन इस बार वे भी मैदान में नहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने शून्य पर सिमट जाने का खतरा पैदा हो सकता था।
दूसरा विकल्प यह था कि सीटों पर बात न बनने के आधार पर कांग्रेस स्वयं गठबंधन से बाहर होने की घोषणा कर दे, जिससे गठबंधन से बाहर जाने का दाग अखिलेश यादव पर न लगे। इस स्थिति में नुकसान यह हो सकता था कि पार्टी को ज्यादा सीटों पर सफलता न मिलती। हालांकि, इसका एक लाभ यह हो सकता है कि कांग्रेस बाकी सीटों पर चुनाव लड़ती और हर सीट पर उसका प्रचार होता। कांग्रेस इस चुनाव का लाभ उस दलित-पिछड़े-मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने में करने का प्लान बना रही है, जिसके सहारे वह अपनी दूसरी पाली में खड़ी होने का सपना देख सकती है। लेकिन अखिलेश के फॉर्मूले से पार्टी के यह उद्देश्य पूरा न होता।
पश्चिम क्यों गई यात्रा
नेता के अनुसार, पहले भारत जोड़ो न्याय यात्रा को कानपुर के बाद झांसी के रास्ते मध्यप्रदेश ले जाने की तैयारी थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को इस रूट से इसलिए अलग रखा गया था, क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा 1.0 में ही इसे कवर कर लिया गया था। लेकिन बाद में यात्रा का रूट बदलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश कर दिया गया।
इसका दो बड़ा कारण था- पहला तो कांग्रेस अखिलेश यादव को यह संदेश देना चाहती थी कि वह उनके दबाव में एक सीमा से आगे नहीं जाएगी। वह अपने उस कोर वोट बैंक और कोर एरिया से समझौता नहीं करेगी, जहां उसके मजबूत होने की संभावनाएं हैं। दूसरा- पूरे देश में इस समय मुसलमान मतदाता कांग्रेस के पक्ष में एकजुट दिखाई पड़ रहे हैं। ऐसे में ऐन चुनावों के मौसम में पार्टी के लिए यह ज्यादा सही होगा कि वह मुसलमान मतदाताओं के बीच पहुंचे और उन्हें अपने से एकजुट होने का संदेश दे।
राहुल गांधी की यात्रा बिहार से पश्चिम बंगाल तक हर उस एरिया से गुजरी है, जहां मुसलमानों की आबादी बहुत ज्यादा है। इसी रणनीति को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी की यात्रा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ा गया। पश्चिम उत्तर प्रदेश ही है जहां कांग्रेस को यूपी में सबसे ज्यादा संभावनाएं बन सकती हैं। उलटे, यदि समाजवादी पार्टी कांग्रेस से अलग हो गई तो उसे मुसलमान मतदाताओं को भारी नुकसान हो सकता है, जिसके बिना पश्चिमी यूपी में जीतने की वह कल्पना भी नहीं कर सकती है।