उत्तर प्रदेश में पार्टी को तीन चौथाई बहुमत दिलाने के शिल्पकार भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने न सिर्फ लोकसभा चुनाव के बाद सोशल इंजीनियरिंग पर काम शुरू कर दिया था, बल्कि चुनाव के दौरान हर चरण के लिए अलग-अलग रणनीति बना कर विरोधियों को मात दी। अपनी इसी सोशल इंजीनियरिंग के सहारे शाह इस सूबे में गैरयादव पिछड़ी जातियों का यादव बिरादरी के खिलाफ, गैरजाटव बिरादरी का जाटवों के खिलाफ समानांतर ध्रुवीकरण कराने में कामयाब रहे। गरीब बनाम अमीर के मुद्दे को जमीन पर उतार कर नोटबंदी के विरोध में बना माहौल भी खत्म कर दिया।
पहले चरण से ही भाजपा के खिलाफ नकारात्मक संदेश न जाए, इसके लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभावी जाट बिरादरी को मनाने के लिए खुद मैदान में उतरे। उत्तर प्रदेश की सियासी जंग जीतने के लिए लोकसभा चुनाव के बाद से ही लगातार मोर्चे पर जुटे शाह ने सभी डेढ़ लाख बूथों पर संगठन खड़ा किया और सभी बूथ प्रभारियों से सीधा संवाद किया। चुनाव प्रचार के करीब दो महीने के दौरान शाह ने 150 रैलियां कीं और 17 दिन लखनऊ से बाहर बिताकर रात में कार्यकर्ताओं से सीधी बातचीत की।
शाह के करीबी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में पहले चरण के मतदान से बनी हवा के अंत तक कायम रहने का ट्रेंड है। ऐसे में शाह के समक्ष आरक्षण न मिलने से नाराज जाट बिरादरी और नोटबंदी से नाराज व्यापारी वर्ग को मनाने की चुनौती थी। जाट बिरादरी को मनाने के लिए शाह ने प्रथम चरण के चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री चौधरी बिरेंद्र सिंह के आवास पर इस बिरादरी के सभी प्रभावशाली नेताओं से मिलकर इनकी नाराजगी दूर की। मेरठ में व्यापारी की हत्या के विरोध में रोड शो रद्द कर शाह ने इस वर्ग को भी मनाने में सफलता हासिल की। तीसरा और चौथा चरण सपा का मजबूत गढ़ रहा है।