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भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन पर भारी पड़ा सपा-बसपा का गठबंधन

Fri, 11 Jan 2019 09:02 PM IST
Avdhesh Kumar अमित शर्मा, नई दिल्ली
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सपा, बसपा
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भाजपा के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों का खूब बखान किया। सर्जिकल स्ट्राइक, आयुष्मान योजना, जनधन योजना और नोटबंदी से लेकर पार्टी का आधार 5-6 राज्यों से बढ़कर बीस राज्यों तक जा पहुंचने को उन्होंने पिछले पांच साल की उपलब्धियों के रूप में गिनाया। लेकिन इस पूरे अधिवेशन पर सपा-बसपा के गठबंधन की छाया साफ दिखाई पड़ी। 
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खुद अमित शाह ने इसे अवसरवादी गठबंधन करार दिया और कहा कि जो लोग कल तक एक दूसरे से बात करने को तैयार नहीं थे, वे आज अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए साथ आने को मजबूर हो गये हैं। लेकिन इस गठबंधन की चुनौती किस तरह की है इस बात का एहसास उन्हें भी है। इस बात का संकेत उनके उस बयान से साफ जाहिर हो जाता है जिसमें उन्होंने कहा कि उनके कार्यकर्ता हर सीट पर पचास फीसदी से अधिक मत फीसद हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं और वे इस बार पिछली बार की तुलना में ज्यादा सीटें जीतेंगे।

पार्टी के शीर्ष नेताओं में ही नहीं, अधिवेशन में पहुंचे कार्यकर्ताओं में भी इस बात की चर्चा खूब हुई कि उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा का गठबंधन और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के साथ बनने वाला संभावित गठबंधन भाजपा को कितना नुकसान पहुंचा सकता है। यूपी की राजनीति से जुड़े कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना था कि गठबंधन पार्टी के लिए परेशानियां पैदा कर सकता है। 
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हलांकि कांग्रेस के नेतृत्व में बनने वाले गठबंधन को कार्यकर्ता पार्टी के लिए बड़ी परेशानी का सबब नहीं मानते। हलांकि उत्तरप्रदेश के भाजपा प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने कहा कि सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण देने की पहल कर पार्टी ने अच्छा दांव खेला है। इससे सामान्य वर्ग के युवा बड़ी संख्या में पार्टी के प्रति आकर्षित हुए हैं। 
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काम हुआ, पर जातीय गणित से होगी परेशानी

राष्ट्रीय अधिवेशन में पहुंचे उत्तर प्रदेश के एक कार्यकर्ता ने बताया कि पूर्वी उत्तरप्रदेश ने पिछली बार भाजपा की जीत के लिए नींव तैयार करने का काम किया था, लेकिन अनुसूचित जाति और पिछड़ी जातियों के बाहुल्य वाले इस क्षेत्र में इस बार चुनौती वाकई बेहद कठिन है। पार्टी को इस बात का एहसास उसी समय हो गया था जब खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के गृहनगर में पार्टी के उम्मीदवार उपचुनाव में हार गये थे। 

कार्यकर्ता के मुताबिक पार्टी ने काम करने में कोई कमी नहीं रखी है लेकिन क्षेत्र का जातीय समीकरण नहीं सधा तो मामला बिगड़ सकता है। अनुप्रिया पटेल और राजभर की नाराजगी समय रहते दूर न की गई तो मामला हाथ से निकल सकता है।

उत्तरप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा का गठबंधन एक दूसरे को बचाने की कोशिश कर रहे दो आरोपियों का गठबंधन है। जनता ने दोनों को सत्ता देकर देख लिया है। उत्तरप्रदेश के लोग अभी भी सपा का अपराधियों के वर्चस्व वाला शासन देखा है। वहीं दूसरी ओर हमारी सरकार में अपराधी भागते फिर रहे हैं। ऐसे में कोई गठबंधन नरेंद्र मोदी की राह रोकने वाला नहीं है।    

बेवजह नहीं थी साथियों के सम्मान की बात

एक दिन पूर्व ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली में यह कहा था कि उनकी पार्टी अपने साथियों का सम्मान खूब करती है और उन्हें फलने-फूलने का समय देती है। उनके इस बयान को एनडीए के बिखरते कुनबे को देखकर लगाया जा सकता है। पार्टी को भी इस बात का एहसास है कि अगर एनडीए के कुनबे में और साथियों को नहीं जोड़ा गया तो स्थिति बिगड़ सकती है।
 
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