खरीफ सीजन की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है। देश में अब 1088.50 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। यह पिछले वर्ष से लगभग 48 हजार हेक्टेयर अधिक है, लेकिन 2021 के मुकाबले करीब 5.84 लाख हेक्टेयर कम में बुवाई हुई है। अगस्त के मध्य तक बुवाई का रकबा काफी कम था, लेकिन उसके बाद इसमें सुधार हुआ। बारिश के चलते जहां धान का रकबा बढ़ा, लेकिन दलहन व तिलहन की बुवाई कमजोर रही।
कृषि मंत्रालय के अनुसार पिछले साल पूरे देश में 193.29 लाख हेक्टेयर में तिलहन की फसलों की बुवाई हुई थी, लेकिन इस साल अब तक 191.49 लाख हेक्टेयर में तिलहन लगाया गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 1.80 लाख हेक्टेयर कम है। तिलहन की बुवाई के मामले में कर्नाटक सबसे पिछड़ा हुआ है। यहां 10.02 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 7.96 लाख हेक्टेयर में ही तिलहन लगाया गया है। वहीं, दलहन की खेती 119.91 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 11.26 लाख हेक्टेयर (8.59%) घटा है। वहीं, 2021 से 16.66 लाख हेक्टेयर में बुवाई कम हुई है।
403.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुवाई
ताजा आंकड़ा बताते हैं कि खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है। पिछले साल 392.81 लाख हेक्टेयर धान लगाई गई थी, लेकिन इस साल अब तक 403.40 लाख हेक्टेयर में धान लगाई जा चुकी है। यदि तुलना 2021 से की जाए तो चालू सीजन में लगभग 10.90 लाख हेक्टेयर धान का रकबा घटा है। जिन राज्यों में धान का रकबा घटा है, उनमें झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना शामिल हैं।
2021 से तुलना इसलिए जरूरी
अगस्त के बाद कुछ राज्यों में बुवाई का आंकड़ा बढ़ा है, लेकिन देश में यदि अच्छी बुवाई की बात करनी है तो तुलना 2022 से नहीं बल्कि 2021 से करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि मानसून में अनियमितता के चलते 2022 में खरीफ सीजन की बुवाई काफी कम हुई थी।
कम बारिश ने बढ़ाई चिंता
अगस्त में बारिश की बेरुखी ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। 31 अगस्त तक बारिश के आंकड़ों के मुताबिक देश में सामान्य से 36% तो 10 सितंबर तक 10% कम बारिश हुई है।