इस बयान के जरिए विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। इसमें कहा गया है कि भोजन, पहनावा, विश्वास, त्योहार और भाषा के नाम पर समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जा रही है।
देश की 13 विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने शनिवार को संयुक्त बयान जारी कर देश में नफरत फैलाने वाले बयानों और सांप्रदायिक हिंसा की हालिया घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने देश की जनता से शांति और सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की। इन 13 नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राकांपा प्रमुख शरद पवार के अलावा तूणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, द्रमुक के एमके स्टालिन और झामूमो के हेमंत सोरेन शामिल हैं।
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इन नेताओं ने कहा, हम प्रधानमंत्री की चुप्पी से स्तब्ध हैं। प्रधानमंत्री ऐसे लोगों की आलोचना में विफल रहे हैं जो अपने शब्दों और हरकतों से समाज में कट्टरता फैला रहे हैं। यह चुप्पी इस बात का सुबूत है कि ऐसा करने वाली हथियारबंद निजी भीड़ को सरकारी संरक्षण हासिल है। इन नेताओं ने ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को सख्त सजा देने की मांग की। बयान पर माकपा के सीताराम येचुरी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला, राजद के तेजस्वी यादव, भाकपा के डी राजा, फॉरवर्ड ब्लॉक के देबव्रत बिस्वास, आरएसपी के मनोज भट्टाचार्य, आईयूएमएल के पीके कुन्हलीकुट्टी और भाकपा-माले के दीपांकर भट्टाचार्य ने भी दस्तखत किए हैं।
बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि विपक्ष देश में समाज में भेदभाव पैदा करने वाली जहरीली विचारधारा से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, हम उस सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे जिसने सदियों से भारत को परिभाषित और समृद्ध किया है। हम समाज के सभी वर्गों से शांति बनाए रखने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को तेज करने वालों के प्रयास को विफल करने की अपील करते हैं। हमारी पार्टियों पूरे देश में शांति और सद्भाव बरकरार रखने के काम में स्वतंत्र रूप से या मिलकर काम करेंगीं।
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भोजन, पहनावे, धार्मिक विश्वास, त्योहार, भाषा को लेकर विवाद
सत्तापक्ष से जुड़े लोग जिस तरह नागरिकों के भोजन, पहनावे, धार्मिक विश्वास, त्योहार और भाषा से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल कर ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं वह चिंताजनक है। देश के कई हिस्सों में 10 अप्रैल को रामनवमी के दिन सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई थी। इसके अलावा कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद देश के कुछ भागों में फैला था। रामनवमी को ही दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में मांसाहार और पूजा को लेकर छात्रों में झगड़ा हुआ।
हिंसा वाले क्षेत्र में एक जैसा पैटर्न
सांप्रदायिक हिंसा की हालिया घटनाओं को लेकर बयान में कहा गया है कि जिन इलाकों में ये घटनाएं हुई हैं उनके एक समान शरारतपूर्ण पैटर्न देखा गया है। सशस्त्र धार्मिक जुलूस निकाले जाने से पहले नफरत फैलाने वाले बयान दिए जाते हैं। बाद में वहां सांप्रदायिक हिंसा होती है। इस मामले में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर भी इन नेताओं ने चिंता जताई।