भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर पलटवार किया है। उन्होंने सोनिया गांधी की 'नफरत का वायरस' वाले तंज को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी वोट बैंक के लिए वर्षों तक घृणा फैलाती रही है। उन्होंने पलटवार करते हुए आगे कहा कि कांग्रेस ने नफरत के वायरस को वर्षों तक अपने पास रखकर समाज में नफरत फैलाई है। इस दौरान उन्होंने देश की संस्कृति को वोट बैंक के लिए बर्बाद करने का आरोप भा कांग्रेस पर लगाया। उन्होंने कहा कि आज वही कांग्रेस हमें सलाह देने का काम कर रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने हमला करते हुए आगे कहा कि कांग्रेस को अपने गिरेबान में झांक कर देखने की जरूरत है। कांग्रेस के शासल काल में हर साल में दंगे-फसाद होते थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में ही शाहबानो केस का कुख्यात फैसला आया था। आज वही पार्टी सांप्रदायिकता की बात कर रही है।
तरुण चुग ने कहा कि हमारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की एक स्पष्ट नीति है जो ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ पर चलती है। उन्होंने आगे कहा, मैं सोनिया गांधी जी से एक अनुरोध करूंगा कि जितना हो सके समझदारी से अपने शब्दों का चयन करें। अगर आप कांग्रेस के गिरेबान में झांक कर देखेंगे तो सबसे ज्यादा सांप्रदायिकता फैलाने वाला संगठन कांग्रेस को ही पाएंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वायरस कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा फैलाया जाता है।
सोनिया गांधी ने साधा था सरकार पर निशाना
इससे पहले कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र में अपने लेख द्वारा सरकार पर नफरत, कट्टरता और असहिष्णुता फैलाने का आरोप लगया था। उन्होंने कहा था कि नफरत, कट्टरता और असहिष्णुता देश को अपनी चपेट में ले रही है, अगर इन्हें रोका नहीं गया तो यह समाज को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने लोगों से 'घृणा की इस प्रचंड आग और सुनामी' को रोकने का आग्रह किया। लेख में सोनिया ने लिखा कि अगर इस आग को नहीं रोका गया तो ये पिछली पीढ़ियों द्वारा इतनी मेहनत से बनाई गई सभी चीजों को नष्ट कर देगी।
इस लेख में सोनिया ने 'नफरत के वायरस' की बात कही है। उन्होंने लिखा कि नफरत और विभाजन का वायरस है जो अविश्वास को बढ़ाता है और देश में स्वस्थ बहस को दबाता है ये एक देश और समाज के रूप में हमें नुकसान पहुंचा रहा है। इस दौरान उन्होंने सवाल भी किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे लोगों को हिदायत क्यों नहीं देते जो ऐसी बातें करते हैं जिससे समाज में विभाजन होता है? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या भारत को स्थायी ध्रुवीकरण की स्थिति में होना चाहिए? उसने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल स्पष्ट रूप से भारत के नागरिकों को यह विश्वास दिलाना चाहता है कि ऐसा वातावरण उनके सर्वोत्तम हित में है।