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बिलॉन्गिंग: पेंगुइन इंडिया के इनकार के बाद ये प्रकाशक छापेगा सोनिया गांधी की आत्मकथा, 10 नवंबर से होगी बिक्री

Fri, 04 Sep 2026 12:36 PM IST
नितिन गौतम एएनआई, नई दिल्ली

सार

भारत में सोनिया गांधी की आत्मकथा बिलॉन्गिंग छपने का रास्ता साफ हो गया है। हार्पर कॉलिन्स ने इसे छापने का एलान कर दिया है। बीते कई दिनों से विवाद के चलते इस किताब के छपने पर संशय था, लेकिन अब हार्पर कॉलिन्स ने बयान जारी कर बताया है कि 10 नवंबर 2026 से किताब बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। 
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सोनिया गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत में सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' अब हार्पर कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित की जाएगी। हार्पर कॉलिन्स ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी है। अपने पोस्ट में हार्पर कॉलिन्स ने लिखा, 'हार्पर कॉलिन्स इंडिया सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरण किताब 'बिलॉन्गिंग-ए जर्नी ऑफ लव' को प्रकाशित करेगी। लंबे समय से प्रतीक्षित यह संस्मरण भारत में 10 नवंबर, 2026 को प्रकाशित होगा।'
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हार्पर कॉलिन्स ने सोनिया की आत्मकथा को बताया- हमारे समय का सबसे बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरण
बयान में कहा गया, 'हमारे समय के सबसे बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरणों में से एक ‘बिलॉन्गिंग’ प्रेम, पहचान, कर्तव्य और अपनत्व की एक नाटकीय एवं बेहद निजी कहानी है। यह पुस्तक भारत की यात्रा और उसके विकास को एक दुर्लभ अंदरूनी नजरिए से प्रस्तुत करती है।' गौरतलब है कि सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर देश में खूब सियासत हुई। दरअसल पेंगुइन इंडिया ने सोनिया गांधी की आत्मकथा को छापने से इनकार कर दिया था। 

किताब को लेकर क्यों मचा बवाल?
दरअसल सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन के अधिकार हासिल करने वाली कंपनी- पेंग्विन रैंडम हाउस ने भारत में सोनिया की आत्मकथा को प्रकाशित न करने का फैसला लिया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रकाशक कंपनी ने किताब की मूल स्क्रिप्ट में कुछ संपादकीय बदलावों और संवेदनशील हिस्सों को हटाने की मांग की, जिसे सोनिया गांधी ने स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पेंग्विन ने इस प्रोजेक्ट से अपने कदम पीछे खींच लिए। हालांकि पेंगुइन रैंडम इंडिया की प्रकाशन इकाई अल्फ्रेड ए. नॉफ, दुनियाभर में इस किताब का प्रकाशन कर रही है। 
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किताब को लेकर खिंची सियासी तलवारें
पेंग्विन इंडिया के भारत में किताब छापने से इनकार के बाद इस मुद्दे पर जमकर सियासी तकरार देखने को मिली। कांग्रेस ने प्रकाशक कंपनी के इस फैसले के पीछे केंद्र के दबाव को वजह बताया, वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रकाशक कंपनी और उसकी ओर से की गई 'तथ्यों की जांच' पर डाल दी।
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