पर्यावरणविद और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के ऑनलाइन आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने खुद को इस आंदोलन का 'मानद कॉकरोच' बताया है। वांगचुक ने सरकार से अपील की है कि वह युवाओं की डिजिटल अभिव्यक्ति को दबाने के बजाय उनकी चिंताओं पर ध्यान दे और उनसे बात करे।
यह ऑनलाइन अभियान व्यंग्य और कॉकरोच के प्रतीक का उपयोग करता है। यह आंदोलन बेरोजगारी, पेपर लीक और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर आधारित है। इस अभियान के संस्थापकों का दावा है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए जा रहे हैं और उन्हें हैक करने की कोशिश हो रही है।
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पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में वांगचुक ने कहा कि इस अभियान को लोकतंत्र में एक फीडबैक की तरह देखना चाहिए, न कि किसी खतरे के रूप में। उन्होंने कहा, 'मैं युवाओं की इस रचनात्मकता से बहुत प्रभावित हूं। सरकार को संदेश समझना चाहिए और संदेश देने वाले को खत्म नहीं करना चाहिए। अगर हम संदेश देने वाले को खत्म करेंगे, तो संदेश खत्म नहीं होगा।'
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस आंदोलन में शामिल होंगे, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह इसके सदस्य बनने की योग्यता नहीं रखते। उन्होंने कहा, 'मुझसे कई लोगों ने इस पर बोलने के लिए कहा है। कुछ कह रहे हैं कि मुझे सदस्य बनना चाहिए। मुझे लगता है कि मैं इसके लायक नहीं हूं क्योंकि मैं न तो बेरोजगार हूं और न ही आलसी। इसलिए मैं सदस्य तो नहीं हूं, लेकिन खुद को एक मानद कॉकरोच मानता हूं।'
वांगचुक ने इसकी तुलना अखबारों में छपने वाले कार्टूनों से की। उन्होंने कहा कि जैसे प्रधानमंत्री या मंत्रियों के कार्टून बनाने पर किसी को सजा नहीं दी जाती, वैसे ही यह भी एक व्यंग्य है। इसे सरकार को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए। उन्होंने युवाओं की तारीफ करते हुए कहा कि भारत के युवाओं ने विरोध के लिए हिंसा या पत्थरों के बजाय डिजिटल रचनात्मकता को चुना है। यही चीजें भारत को 'विश्वगुरु' बनाती हैं।
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उन्होंने चेतावनी दी कि ऑनलाइन आवाज दबाने से युवाओं में गुस्सा बढ़ सकता है। उन्होंने नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इंटरनेट बंद करने और अभिव्यक्ति रोकने से युवा सड़कों पर उतर आए थे और स्थिति हिंसक हो गई थी। वांगचुक ने कहा कि पेपर लीक जैसे मुद्दे गंभीर हैं और कई देशों में ऐसे मुद्दों पर मंत्री इस्तीफा दे देते हैं।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह युवाओं को किसी कोने में न धकेले। साथ ही उन्होंने युवाओं से भी कहा कि वे हमेशा शांतिपूर्ण रहें और कभी भी हिंसा का रास्ता न अपनाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज अभी सुनी जानी चाहिए ताकि उनका गुस्सा सड़कों पर न आए।