शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के बाद भूख हड़ताल खत्म कर दी। इसके बाद शुक्रवार देर रात उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया। इस वीडियो में सोनम को गुस्से में देखा जा सकता है। अस्पताल से बाहर आते समय सोनम वहां मौजूद पुलिस अफसर / सुरक्षाकर्मी पर भड़कते दिखे। उन्होंने कहा कि अगर तनाव के कारण उनकी मौत हो जाए, तो इसके जवाबदेह आप होंगे। जिस समय सोनम अपने गुस्से अस्पताल से बाहर निकल रहे हैं, उनके साथ पत्नी गीतांजलि भी दिखीं।
26 दिन की भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक क्या बोले?
सोनम गुस्से में कहते सुने जा सकते हैं कि अगर किसी को हिम्मत है तो उन्हें गिरफ्तार कर सकता है। उन्होंने भूख हड़ताल के बाद तीन घंटे तक अस्पताल में जबरन रोक कर रखे जाने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने एक्स हैंडल पर अपने नए वीडियो के साथ ये भी लिखा, क्या 26 दिन की भूख हड़ताल के बाद भी मुझे अपनी ईमानदारी साबित करने की जरूरत है!!! उन्होंने अपनी नई वीडियो को अधिक से अधिक संख्या में देखने और शेयर करने की अपीाल की। सोनम ने लिखा है कि एक्स पर शेयर की गई क्लिप से इतर उनका पूरा 22 मिनट वाला वीडियो यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है।
यूट्यूब की 22 मिनट वाली वीडियो में क्या?
वांगचुक ने कहा, 'दोस्तों, यह वीडियो मैं थोड़ा दुख और थोड़ा हैरानी, थोड़ा गम और गुस्से के साथ बना रहा हूं। अपने भाइयों और बहनों के छात्रों के लिए 26 दिन भूखा रहने के बाद जिसमें कि मेरे 11 किलो शरीर खत्म हो चुका है। मसल्स चले गए हैं। ऑर्गन और दिमाग को गंभीर नुकसान (इररिवर्सिबल डैमेज) पहुंचा है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से हो रही टिप्पणियों से आहत सोनम ने पूछा, लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड से दिल्ली की तपती धूप में बैठकर यह सब करने के बाद क्या मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना होगी कि मेरा अनशन कितना पवित्र था? मैंने तोड़ा तो किसके हाथों तोड़ा? उसके हाथों क्यों तोड़ा? इसके हाथों क्यों नहीं तोड़ा? क्या डील हुआ? क्या सौदा हुआ? क्या मुझे ऐसे जवाब देने होंगे।
बकौल वांगचुक, वे कल से अब तरल लिक्विड फूड ले रहे हैं, पी रहे हैं। तो थोड़ी सी शरीर में जान आई है। बदकिस्मती से वो ऊर्जा मुझे वीडियो बनाने में देनी पड़ रही है। मैं ये बात बड़े दुख के साथ कह रहा हूं। मगर सुबह से मुझे बहुत से लोग फोन करके या पोस्ट दिखाकर कह रहे हैं कि आप पर बहुत सवाल उठाए जा रहे हैं। आपने इनसे क्यों अनशन तुड़वाया? केंद्रीय मंत्रियों से क्यों नहीं तुड़वाया? किसी और से क्यों नहीं तुड़वाया? क्या डील हुई है? मुझे इन सवालों के जवाब देने होंगे। वांगचुक ने निहित स्वार्थ की अटकलों को खारिज करते हुए कहा, 'अगर सौदा करना होता, डील करना होता तो क्या 26 दिन भूखे रहना पड़ता? कितनों ने डील किए हैं? आपने देखा होगा क्या वो इस तरह से डील करते हैं?'
उन्होंने पूछा कि क्या मैं आलीशान एयर कंडीशन कमरे में बैठ के डील सौदा नहीं कर सकता था? मुझे यहां दिल्ली की गर्मी में बाहर रोड किनारे बैठने की जरूरत क्या थी। वांगचुक ने कहा, 'धिक्कार है ऐसे देश पर जिसमें ऐसे दिमागों की उपज होती है जिसमें से ऐसे नीच ख्यालात निकलते हैं। मैं दोष नहीं देता हूं। मैं दोष नहीं देता हूं। आप में से ज्यादातर पर क्योंकि आपको ज्ञान नहीं है। पता नहीं है क्या हालात थे। मेरे ऊपर क्या गुजरा मेरे परिवार पर पिछले एक दो हफ्ते में इसलिए आप लोग ऐसा शायद कह रहे हैं और कुछ लोग शायद जानकर कह रहे हैं पता है उन्हें इसलिए पहले बात सुनने से पहले उसका बैकग्राउंड जरूर देखिएगा क्या उन्हें कोई खुंदक है क्या वो किसी पॉलिटिकल पार्टी से।'
वांगचुक ने कहा, अगर कोई न्यूट्रल आदमी ऐसी टिप्पणी कर रहे हैं तो उनकी बात सुनिएगा और मुझे भी बताइएगा। मैं जवाब देने की अभी भी कोशिश करूंगा। समझे या ना समझे मगर मेरी सद्भावना है और मेरी आपके साथ सिंपथी है। अगर आपको नहीं मालूम है क्या हुआ इन दिनों में और किन हालातों में क्यों अनशन तोड़ा और क्यों इस तरह से तोड़ा।
वांगचुक की बातों के कुछ अहम बिंदुओं में क्या?
- जब मुझे सफदर जंग हस्पताल ले जाया गया जबरदस्ती 18 तारीख को पकड़ कर तो वो सिर्फ अस्पताल नहीं था। वो एक छावनी थी। वो एक जेल था जहां पर मुझे ऐसे रखा गया जैसे कोई कैदी भी शायद ही रहता हो।
- अस्पताल में हर चीज चीज पर पाबंदी थी। बाहर नहीं जा सकता था कमरे से। कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। हमारे कमरे तक किसी से मिलने का कोई वो नहीं था।
- मेरे सिर्फ तीन रिश्तेदार रह सकते थे। कोई संचार का मोबाइल फोन लैपटॉप नहीं रख पाता था मैं। कहीं कोई कुछ संदेश नहीं भेज पाता था।
- मैं किसी तरह नैपकिन पेपर पर लिखकर भेजता था। वो भी कभी-कभी जब्त किए जाते थे।
- मुझसे मिलने मेरे रिश्तेदार मेरे दोस्त जो लद्दाख से आते थे खास हवाई जहाज के लंदन के बराबर टिकट का किराया देकर उन्हें भी वापस लौटा दिया। यह सब गैरकानूनी था। एक तरह का नॉर्थ कोरिया बन गया था हमारा देश और खासकर जहां मैं था यह जेलखाना था।
- ऐसे हालात में कई दिन गुजारने के बाद गीतांजलि उनकी सूझबूझ और उनका कमाल है कि उन्होंने रविवार के दिन भी जो कि 19 तारीख थी दिल्ली हाई कोर्ट की हियरिंग बिठवाई। अदालत में कहा गया कि मैं डिटेंशन में नहीं हूं और उसके बाद भी ऐसा किया जा रहा है।
- फिर मंडे 20 तारीख को हाई कोर्ट की एकल पीठ में अपील की गई जहां अपील खारिज गई।
- 21 तारीख को डबल बेंच में हियरिंग बिठाई गई। अंतत: अस्पताल ने माना कि कि मैं जहां और जिस अस्पताल में भी जाना जाहूं, जा सकता हूं और आजाद नागरिक हूं।
- हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी मुझे सफदर जंग से जाने नहीं दिया गया। यह कहकर कि हमें आर्डर नहीं गया आया है। 2:00 बजे शायद आर्डर दी गई। 7:00 बजे तक ऑर्डर को रोक के गया रखा गया और उन्हें नहीं दिया गया ताकि मैं ना जा पाऊं।
- पता नहीं क्या मंशा और मंसूबे थे उनके। 3 घंटे सामान पैक करके हमें बिठाया गया। फिजिकली लड़ के झगड़ के... जोर लगाकर मुझे बाहर जबरदस्ती निकलना पड़ा।
प्रधानमंत्री ने भी कुछ मिनटों के अंतर पर शेयर किया नया वीडियो?
जिस समय सोनम ने एक्स हैंडल पर अपना ये वीडियो जारी किया, लगभग इसी समय के आस-पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी एक वीडियो संदेश सामने आया। इंस्टाग्राम वीडियो में पीएम मोदी कहते सुने जा सकते हैं, उन युवाओं का धन्यवाद जिन्होंने उनकी वीडियो को बड़ी संख्या में देखा।
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पीएम मोदी ने किस वीडियो का जिक्र किया?
दरअसल, गुरुवार को भी पीएम मोदी ने एक वीडियो संदेश इंस्टाग्राम पर ही जारी किया था। इसमें उन्होंने नीट पेपर लीक से निपटने के लिए कैबिनेट की बैठक में बड़े फैसले लेने का आश्वासन दिया था। देर रात सामने आए पीएम मोदी के इस वीडियो संदेश को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में साझा किया गया है।
किस मुद्दे को लेकर सुर्खियों में हैं वांगचुक और सीजेपी?
अभिजीत दीपके की तरफ से शुरू की गई मुहिम- कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तहत जंतर-मंतर पर बीते एक महीने से अधिक समय से धरना-प्रदर्शन हो रहा है। इससे सोनम वांगचुक के जुड़ने के बाद आंदोलन और तेज हुआ। उनके 26 दिनों के अनशन के बाद छात्रों और युवाओं में अभी भी जिस तरह का आक्रोश दिख रहा है, माना जा रहा है कि पीएम मोदी का इंस्टा वीडियो सीधा जेन-जी से संवाद करने की पहल है।