युद्ध में घायल सैनिक और उसके परिवार को अब सरकारी खर्च पर इलाज के लिए अस्पताल में एक वर्ष तक रहने की सुविधा मिलेगी। पहले यह सुविधा अधिकतम तीन महीने के लिए मिलती थी, लेकिन कई बार इलाज अवधि अधिक समय चलने से खर्च का बोझ सैनिकों पर आता था।
राजनाथ सिंह द्वारा पास किए गए इस प्रस्ताव के विषय में रक्षा मंत्रालय ने नया संशोधित प्रेस नोट जारी किया है। संशोधन इसलिए किया गया क्योंकि मंगलवार को जारी प्रेसनोट को लेकर कई सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी।
उनका कहना था कि पुराने प्रेसनोट में कहा गया है कि मृत सैनिक के परिवार को सरकारी खर्च पर तीन महीने से बढ़ाकर एक वर्ष अस्पताल में रहने की सुविधा मिलेगी। पूर्व सैनिकों के अनुसार इससे ज्यादा समय रहने की सुविधा तो मृत सैनिकों के परिजनों को पहले से ही मिलती रही है।
इसके बाद नया प्रेसनोट जारी करके बताया गया कि युद्ध में घायल सैनिकों व उनके परिजनों के लिए यह सुविधा बढ़ाई गई है। इस समय नियमों के अनुसार मृत सैनिक के परिजनों को दो वर्ष सरकारी खर्च पर अस्पताल में इलाज के लिए रहने की सुविधा है।
जरूरी होने पर केस के अनुसार इसे एक वर्ष और फिर छह महीने बढ़ाया जा सकता है। रक्षा मंत्रालय ने नए प्रेस नोट में साफ किया कि मंगलवार को कुछ जानकारियां गलत दी गई थीं, इसके लिए खेद है। बढ़ाई गई सुविधा युद्ध में घायल सैनिकों के परिजनों के लिए है। मंत्रालय के अनुसार थल, वायु और नौ सेना के सैनिकों के उत्साह को बढ़ाने के लिए यह किया गया है।