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Explainer: टेलीग्राम से इंस्टा तक, कैसे-क्यों सोशल मीडिया कंपनियों को लगातार मिले नोटिस, क्या चाहती है सरकार?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 06 Jul 2026 05:29 PM IST

सार

जिन प्लेटफॉर्म्स को सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नोटिस जारी किया है, उनमें व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम शामिल हैं, जिनकी पैरेंट कंपनी मार्क जुकरबर्ग की मेटा है। वहीं, दो और प्लेटफॉर्म्स- टेलीग्राम और सिग्नल हैं। 
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भारत सरकार का कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस। - फोटो : अमर उजाला
भारत की बढ़ती आबादी के साथ देश में विदेशी सोशल मीडिया कंपनियों की पहुंच तेजी से बढ़ी है। आलम यह है मेटा से लेकर एक्स जैसे अलग-अलग सोशल प्लेटफॉर्म्स के लिए इस वक्त भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। हालांकि, एआई के आने के बाद से इनके फीचर्स में लगातार अपग्रेड और भारत की कमजोर नियामक व्यवस्था का असर यह हुआ है कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स संदिग्ध और कई बार अवैध गतिविधियों का जरिया भी बन जाते हैं। अब केंद्र सरकार ने एक के बाद एक चार अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया है और कुछ पुराने-नए फीचर्स को लेकर जवाब दाखिल करने की मांग की है। 

जिन प्लेटफॉर्म्स पर सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से नकेल कसी गई है, उनमें मेटा के दो प्रचलित मंच- व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम शामिल हैं। वहीं, दो और प्लेटफॉर्म्स- टेलीग्राम और सिग्नल हैं। इन सभी के अलग-अलग फीचर्स को लेकर केंद्र सरकार ने हाल ही में सतर्कता बरती है और अगले कुछ हफ्तों में स्पष्टीकरण मांगा है। 
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भारत सरकार का कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस। - फोटो : अमर उजाला
भारत की बढ़ती आबादी के साथ देश में विदेशी सोशल मीडिया कंपनियों की पहुंच तेजी से बढ़ी है। आलम यह है मेटा से लेकर एक्स जैसे अलग-अलग सोशल प्लेटफॉर्म्स के लिए इस वक्त भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। हालांकि, एआई के आने के बाद से इनके फीचर्स में लगातार अपग्रेड और भारत की कमजोर नियामक व्यवस्था का असर यह हुआ है कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स संदिग्ध और कई बार अवैध गतिविधियों का जरिया भी बन जाते हैं। अब केंद्र सरकार ने एक के बाद एक चार अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया है और कुछ पुराने-नए फीचर्स को लेकर जवाब दाखिल करने की मांग की है। 

जिन प्लेटफॉर्म्स पर सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से नकेल कसी गई है, उनमें मेटा के दो प्रचलित मंच- व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम शामिल हैं। वहीं, दो और प्लेटफॉर्म्स- टेलीग्राम और सिग्नल हैं। इन सभी के अलग-अलग फीचर्स को लेकर केंद्र सरकार ने हाल ही में सतर्कता बरती है और अगले कुछ हफ्तों में स्पष्टीकरण मांगा है। 

आइये जानते हैं कि केंद्र सरकार की तरफ से जिन सोशल प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजा गया है, उनके किन फीचर्स को लेकर संशय-चिंता जताई गई है? सरकार ने अपने नोटिस में क्या कहा है और कंपनियों को जवाब देने के लिए कितना समय दिया गया है? सरकार के नोटिस पर इन कंपनियों की शुरुआती प्रतिक्रिया क्या रही है? आइये जानते हैं...


पहले जानें- किस कंपनी को किस फीचर के लिए जारी किया गया नोटिस?

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने हाल ही में अलग-अलग फीचर्स और उनसे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को लेकर कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए हैं...

1. व्हाट्सएप

फीचर: यूजरनेम की सुविधा

नोटिस की वजह: व्हाट्सएप एक ऐसा नया फीचर पेश करने की योजना लाई है, जिससे यूजर्स अपना फोन नंबर शेयर किए बिना केवल एक यूनिक (अद्वितीय) यूजरनेम के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। सरकार ने इस फीचर पर चिंता जताते हुए व्हाट्सएप को नोटिस जारी किया है और इसके रोलआउट (शुरुआत) पर फिलहाल रोक लगाने का निर्देश दिया है। 

स्रोत: रॉयटर्स, आंकड़े 2025 तक के। - फोटो : अमर उजाला

2. टेलीग्राम और सिग्नल

फीचर: यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग 

नोटिस की वजह: व्हाट्सएप पर कार्रवाई करने के ठीक एक दिन बाद, सरकार ने टेलीग्राम और सिग्नल को भी उनके प्लेटफॉर्म पर पहले से मौजूद यूजरनेम फीचर को लेकर नोटिस जारी किया। इतना ही नहीं टेलीग्राम को प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर साझा होने वाली ऑडियो-विजुअल सामग्री को लेकर भी अलग से नोटिस भेजा है। 


3. इंस्टाग्राम

फीचर: पेड विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया 

नोटिस का कारण: एक मीडिया समूह की एक जांच में यह बात सामने आई थी कि इंस्टाग्राम ने कुछ ऐसे पेड विज्ञापनों को मंजूरी दी थी, जो अवैध सामग्री को बढ़ावा दे रहे थे और यूजर्स को इसे खरीदने के लिए बाहरी टेलीग्राम चैनलों पर निर्देशित कर रहे थे। इस खुलासे के बाद मंत्रालय ने इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा को नोटिस जारी किया।

सरकार ने कंपनियों को भेजे नोटिस में क्या चिंता जताई?

1. व्हाट्सएप

सरकार ने यह चिंता जताई है कि बिना फोन नंबर दिखाए बात करने की सुविधा देने वाले इस फीचर से ऑनलाइन धोखाधड़ी (फ्रॉड), फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और दूसरों की फर्जी पहचान बनाकर ठगी करना (इम्पर्सोनेशन) के मामलों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार का मानना है कि इसके जरिए धोखाधड़ी करने वाले आम लोगों, सार्वजनिक अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को आसानी से अपना शिकार बना सकते हैं।

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2. टेलीग्राम और सिग्नल

व्हाट्सएप की तरह ही इन दोनों एप्स को लेकर भी सरकार की मुख्य चिंता पहचान छिपाने की सुविधा से होने वाले फ्रॉड और इम्पर्सोनेशन को लेकर है। सरकार चिंतित है कि यह फीचर स्कैमर्स के लिए अपराध का एक आसान अड्डा बन सकता है, इसलिए सरकार ने यह चिंता जताई है कि क्या इन प्लेटफॉर्म्स के पास ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।

इसके अलावा टेलीग्राम के लिए सरकार ने अलग से एक और नोटिस जारी किया। इसमें टेलीग्राम के जरिए पायरेटेड फिल्मों, ओटीटी शोज और अन्य ऑडियो-विजुअल सामग्री के बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध प्रसार पर गंभीर चिंता जताई है। सरकार की चिंता यह है कि टेलीग्राम कॉपीराइट उल्लंघन (जो भारत में एक आपराधिक कृत्य है) को रोकने के लिए अपनी तरफ से सक्रिय कदम नहीं उठा रहा है और केवल शिकायत मिलने का इंतजार करता है, जिससे भारत की क्रिएटर इकोनॉमी, फिल्म इंडस्ट्री और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नुकसान हो रहा है।

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3. इंस्टाग्राम

मीडिया समूह बीबीसी की जांच में यह पाया गया कि इंस्टाग्राम ने बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापनों को अपने प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने की मंजूरी दी थी। ये विज्ञापन यूजर्स को बाहरी टेलीग्राम चैनलों पर भेज रहे थे, जहां कथित तौर पर इस तरह की अवैध और आपत्तिजनक सामग्री बेची जा रही थी। बीबीसी ने बताया कि उन्होंने भारत में बनाए गए एक टेस्ट अकाउंट के जरिए लगभग 30 ऐसे पेड विज्ञापनों की पहचान की, जो बाहरी टेलीग्राम चैनलों के जरिए बाल यौन शोषण सामग्री को प्रमोट कर रहे थे या उनसे जुड़े थे। 

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सरकार ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापनों को पब्लिश होने की मंजूरी कैसे मिल गई। सरकार की मुख्य चिंता मेटा की विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया में मौजूद खामियों और ऐसे खतरनाक कंटेंट को रोक पाने में प्लेटफॉर्म के सुरक्षा उपायों की विफलता को लेकर है।

स्रोत: DataReportal, आंकड़े 2025 तक के। - फोटो : अमर उजाला

सरकार ने कंपनियों को जवाब देने के लिए कितना समय दिया? 

भारत सरकार ने अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स को भेजे गए नोटिस में जवाब देने के लिए अलग-अलग समय-सीमा तय की है। व्हाट्सएप के लिए पहले यह सीमा तीन दिन थी, हालांकि बाद में इसे बढ़ा दिया गया।

व्हाट्सएप: 1 जुलाई को यूजरनेम फीचर को लेकर भेजे गए नोटिस का स्पष्टीकरण देने और जरूरी दस्तावेज सौंपने के लिए सरकार ने पहले कंपनी को तीन दिन का समय दिया। हालांकि, बाद में इसे बढ़ाकर नौ जुलाई तक कर दिया।

टेलीग्राम-सिग्नल: 2 जुलाई को यूजरनेम फीचर पर ही आईटी मंत्रालय ने टेलीग्राम-सिग्नल को भी नोटिस भेजा। हालांकि, इनके जवाब देने के लिए कोई निश्चित टाइमलाइन सामने नहीं आई है। 

इंस्टाग्राम: 4 जुलाई को सरकार ने मेटा को अपनी विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया और सुधारात्मक कदमों की जानकारी देने के लिए सात दिन का समय दिया है। इस लिहाज से इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा को 11 जुलाई तक जवाब दाखिल करना होगा।

टेलीग्राम (दूसरे मामले में): 4 जुलाई को ही पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी सामग्री के अवैध प्रसार के मामले में, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को सुधारात्मक कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 दिन का समय दिया है।

सरकार के नोटिस पर क्या रही है इन कंपनियों की प्रतिक्रिया?

1. व्हाट्सएप

व्हाट्सएप ने सरकार को जवाब देते हुए कहा है कि उसका यूजरनेम फीचर अभी लाइव नहीं हुआ है और इसे साल के अंत तक कई सुरक्षा उपायों के साथ धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा। कंपनी का तर्क है कि यह फीचर यूजर्स की निजता बढ़ाने के लिए लाया जा रहा है, ताकि उन्हें अजनबियों के साथ अपना फोन नंबर शेयर न करना पड़े।
  • कंपनी ने सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं और मेटा-वेरिफाइड अकाउंट्स के यूजरनेम को पहले से ही रिजर्व कर लिया है, ताकि कोई स्कैमर उनके असली नाम या मिलते-जुलते नाम से फर्जी अकाउंट न बना सके।
  • अतिरिक्त सुरक्षा के लिए इसमें एक वैकल्पिक 'यूजरनेम की' (पिन/पासवर्ड जैसा) सेट करने की सुविधा होगी। किसी भी अनजान व्यक्ति को मैसेज करने के लिए यूजरनेम के साथ-साथ यह कोड भी पता होनी चाहिए। 
  • कंपनी का कहना है कि इस फीचर के आने के बाद भी व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने के लिए एक वैध फोन नंबर से रजिस्टर करना अनिवार्य रहेगा।
  • अगर मैसेज भेजने वाले का फोन नंबर यूजर के देश से अलग किसी अन्य देश का है, तो पहली बार मैसेज आने पर सिस्टम यूजर को चेतावनी देगा।
  • व्हाट्सएप ने बताया कि वह नए खातों द्वारा अपरिचितों को संपर्क करने की सीमा तय करेगा, बार-बार गलत 'यूजरनेम की' डालने पर ब्लॉक करेगा, और फर्जीवाड़े के पैटर्न दिखने पर अकाउंट्स को प्लेटफॉर्म से हटा देगा।

2. इंस्टाग्राम

बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर सरकार के नोटिस का जवाब देते हुए इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने कहा कि ऐसी सामग्री के प्रति उसकी जीरो-टॉलरेंस की नीति है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि बीबीसी की जांच में जिन 30 विज्ञापनों की पहचान हुई थी, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है और उन्हें चलाने वाले अकाउंट्स को निष्क्रिय कर दिया गया है।

कंपनी ने बताया कि वह नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट का पता लगाने और उसे हटाने के लिए विशेषज्ञ समीक्षा टीमों के साथ-साथ एआई-आधारित डिटेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल करती है। मेटा ने यह भी कहा कि वह बाल सुरक्षा संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर इस दिशा में काम कर रहा है।


3. टेलीग्राम और सिग्नल

फिलहाल टेलीग्राम और सिग्नल को भेजे गए नोटिस पर इन कंपनियों की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इन नोटिस पर विशेषज्ञ/संस्थानों की क्या राय?

जहां तकनीकी जानकारों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के अलग-अलग फीचर्स पर चिंता जताई है, वहीं डिजिटल अधिकार पैरोकार समूह इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (आईएफएफ) ने सरकार की ओर से यूजरनेस मामले में व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल को भेजे गए नोटिस की कानूनी वैधता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। संस्थान का कहना है कि सरकार के इस नोटिस का कानून में कोई स्पष्ट आधार नहीं है। आईएफएफ ने सरकार से इन नोटिसों को वापस लेने की मांग की। 

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन का बयान। - फोटो : अमर उजाला
आईएफएफ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि मंत्रालय ने किसी ऐसे कानूनी प्रावधान का जिक्र नहीं किया है जो उसे कोई उत्पाद (प्रोडक्ट फीचर) जारी होने से पहले उसे मंजूरी देने या उसे वापस लेने का आदेश देने का अधिकार देता हो।


क्या सरकार इन पर कार्रवाई भी कर सकती है?

सरकार इन मामलों में तय कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई कर सकती है, हालांकि इसके लिए इस्तेमाल की जा रही कानूनी शक्तियों पर कुछ सवाल भी उठे हैं। 


1. सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत कार्रवाई

सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट, 2000) और उससे जुड़े अन्य नियमों के तहत कार्रवाई करने पर विचार कर सकती है। सरकार ने मेटा (व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक की पैरेंट कंपनी) से स्पष्ट रूप से पूछा है कि आईटी एक्ट और संबंधित नियमों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि क्या यह फीचर मौजूदा कानूनी ढांचे का उल्लंघन करता है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि व्हाट्सएप अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर सरकार को संतुष्ट करने में विफल रहता है, तो उसे भारत में यूजरनेम फीचर को रोलआउट करने की अनुमति पूरी तरह से नहीं दी जाएगी।

2. पायरेसी पर आपराधिक कार्रवाई 

टेलीग्राम पर पायरेटेड सामग्री (फिल्में/ओटीटी कार्यक्रमों) के मामले में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने टेलीग्राम को याद दिलाया है कि भारत में कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत कॉपीराइट का उल्लंघन केवल एक दीवानी (सिविल) मामला नहीं है, बल्कि यह एक आपराधिक कृत्य है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी का जवाब अधूरा या टालमटोल वाला होता है, और अवैध सामग्री उपलब्ध रहती है, तो कानूनी ढांचे के तहत उस पर कड़ी जांच और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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